(सुरेन्द्र स्वामी) कोरोना संक्रमण बेकाबू होता जा रहा है। और मौतों का ग्राफ भी बढ़ रहा है। लापरवाही और चिंता वाली बात ये है कि अस्पतालों में परिजन समय पर इलाज के लिए निर्णय नहीं कर पाए। मरीजों को देर से अस्पताल में लाया जा रहा है। अस्पतालों में मृत लाए गए 14 मरीजों की मौत का कारण ये ही है। ऐसे भी 21 लोग है, जिन्हें डायबिटिज, दिल, लिवर की बीमारी और अन्य कारणों से देरी नहीं होने के बावजूद मौत हो गई। अब तक 108 ऐसे कोरोना संक्रमित मरीज मिले है, जो मृत अवस्था में अस्पताल लाए गए।
यह खुलासा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से 55 मरीजों के सोशल ऑडिट के दौरान हुआ है। विभाग के निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ.के.के.शर्मा का कहना है कि सरकार के निर्देश पर मौत के कारणों का पता करने के लिए सोशल ऑडिट की जा रही है। गठित टीम के सदस्य विभिन्न तरह की जानकारी लेकर कारणों का पता करते है।
क्या कहते है एक्सपर्ट
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व मेडिसन विभाग के डॉ.रमन शर्मा का कहना है कि डिजीज मरीजों को तुरन्त अस्पताल ले जाना चाहिए। परिजन डॉक्टर की बात नहीं मानते। कोरोना का खौफ के चलते अस्पतालों में लाने से डरते है। कहीं हम भी कोरोना संक्रमित न हो जाए।
सोशल ऑडिट में परिजन सहयोग नहीं कर रहे। परिवार में दुख की घड़ी में विभाग के अधिकारी व स्टाफ दवाब भी नहीं बना सकते। ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर पर सदस्यीय दल का गठन कर रखा है। इसमें एएनएम, आशा, एलएचवी, चिकित्सा अधिकारी और अन्य शामिल है। सदस्यों को जिला स्तर पर तीन सप्ताह से एक माह के भीतर मृतक के परिजनों से मिलकर आवश्यक जानकारी जुटाते है।
सोशल ऑडिट में खुलासा
- प्रदेश के अस्पतालों में 108 मरीजों को मृत अवस्था में अस्पताल में लाए गए
- 108 में 55 की ऑडिट की है। और 53 की ऑडिट की जा रही है।
- 55 में से 14 की मौत परिजनों की ओर से इलाज के निर्णय लेने में देरी, उपचार में देरी के कारण 5 ने दम तोड़ा
- नॉन कोविड (सुसाइड-अन्य कारण) से 5 मौतें।
- किसी प्रकार की देरी नहीं होने के बावजूद 21 मरीजों ने जान गंवाई
- एक की मौत में कारण का पता नहीं लग सका और एक में सहयोग नहीं
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें