किसानों को जितनी चिंता पीले रंग की टिड्डी से नहीं थी उससे ज्यादा उनके बच्चों ने बढ़ा दी। सोमवार को जिले के 29 गांव तक टिड्डी के बच्चे दिखाई दिए। कृषि विभाग को उनको मारने में पसीने आ गए। कालू,कागासर, राजपुरा,नोखड़ा, अणखीसर, लालासर, बादनू, रायसर, मोरखाना, सलूडिया, कुचोर अथुनी, बरसिंगसर, गीगासर, देशनोक की रोही, रिडी, बाना, ऊपनी,लाडेरा, दुसारणा, इंद्रपाल सर, धर्मास और जैतसर समेत तमाम गांव में फाके उत्पात मचाते रहे। इन 29 गांव के 1540 हेक्टेयर में जब टिड्डी के बच्चे दिखाई दिए तो किसानों ने इसकी सूचना कृषि विभाग और टिड्डी नियंत्रण विभाग को दी।
सोमवार रात को ही दल बल के साथ टीम पहुंची और करीब 9 घंटे की मशक्कत में डेढ़ हजार हेक्टेयर को फाके से मुक्त कराया। दरअसल महीने भर पहले आई टिड्डियों ने अंडे दे दिए और कृषि विभाग को इसका पता नहीं लग सका लेकिन जैसे ही अब बच्चे सामने आ रहे हैं तो यह तय हो गया कि टिड्डी अंडे देकर ही गई।
कृषि विभाग के सहायक निदेशक रामकिशोर मेहरा का कहना है कि हमें जहां से भी सूचना मिल रही है हम फाके को मौके पर ही मार रहे हैं। इस बीच नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने भी कृषि विभाग के उप निदेशक को पत्र लिखकर टिड्डी के बच्चों का नियंत्रण और इंतजाम करने का आग्रह किया।
फाका निरीक्षण करने श्रीडूंगरगढ़ के रामसरा बिग्गा बास पहुंचे कलेक्टर
जिला कलक्टर नमित मेहता ने सोमवार को श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के रामसरा बिग्गा बास में फाके का निरीक्षण कर नियंत्रण गतिविधियों की जानकारी ली और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। जिला कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सभी विभागों को समन्वय रूप से त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश देते हुए कहा कि फाके को नष्ट करने के लिए लेम्डा दवा सभी ग्राम पंचायत स्तर पर रखवा दी गई है साथ ही जो किसान फाका नष्ट करने के लिए ट्रेक्टर का उपयोग कर रहे हैं उन सभी को प्रतिदिन ढाई हजार रुपए की सहयोग राशि दी जाएगी। कलेक्टर ने फाको को नष्ट करने के लिए किसानों को प्रशासन का सहयोग करने की बात कही।
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