नई शिक्षा नीति में पीएचडी को लेकर भी नए प्रावधान किए गए हैं। प्रोग्राम को नए सिरे से रि-डिजाइन व रि-ओरिएंटेड किया गया है। अब पीएचडी प्रोग्राम में क्रेडिट बेस्ड कोर्स लेने को अनिवार्य कर दिया गया है। सभी यूनिवर्सिटी को कुछ खास तरह के पीएचडी प्रोग्राम भी चलाने जरूरी कर दिए गए हैं।
पीएचडी प्रोग्राम को स्वयं प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी मंजूरी दे दी गई है। नई नीति की वजह से साल 2009 में लागू अधिनियम में भी काफी बदलाव आ जाएगा। आरटीयू के डिप्टी रजिस्ट्रार एग्जाम डॉ. नीरज जैन ने बताया शिक्षा नीति के जरिए अब केंद्र सरकार सबसे पहले विश्वविद्यालयों की परिभाषा में बदलाव करेगी जिसमें अलग-अलग तरह के संस्थान खत्म कर दिए जाएंगे।
मतलब, अब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटी और डीम्ड यूनिवर्सिटी का कंसेप्ट खत्म कर दिया जाएगा। अब इन सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सिर्फ यूनिवर्सिटी के नाम से जाना और परिभाषित किया जाएगा। इनमें यूजी-पीजी और पीएचडी कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
इंटर डिसिप्लीनरी रिसर्च से बढ़ेगी नॉलेज
कोटा विवि की डायरेक्टर रिसर्च प्रो. आशुरानी ने बताया कि इंटर डिसीप्लिनरी रिसर्च को मजबूत करने पर छात्रों की नॉलेज काफी बढ़ेगी। रिसर्च को मान्यता मिलने से इसका पॉजीटिव इंपैक्ट सोसायटी के साथ ही इंडस्ट्री पर भी पड़ेगा। नए पीएचडी स्काॅलर्स के लिए अब ये जरूरी होगा कि वे अपने डॉक्टरल ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान अपने पीएचडी विषय से संबंधित शिक्षण, शिक्षा, अध्यापन, लेखन में क्रेडिट आधारित पाठ्यक्रम ही लेंगे।
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