संभागीय आयुक्त भंवरलाल मेहरा ने संभाग में ठोस कचरे, मेडिकल वेस्ट और वेस्ट प्लास्टिक के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ठोस कचरे के निपटारे और तत्काल जवाबदेही तय करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए हैं,उनकी पालना सुनिश्चित होनी चाहिए।


मेहरा ने गुरुवार को संभागीय आयुक्त कार्यालय में उप निदेशक क्षेत्रीय स्वायत्त शासन विभाग, संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की बैठक में कहा कि तीनों ही विभागों को पर्यावरण शुद्ध रखने के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट के कारण कई प्रकार की बीमारियां जैसे-हेपेटाइटिस, हैजा, आंत्रज्वर, पेचिस तथा कॉलरा जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है। अतः ठोस कचरे का निस्तारण सावधानीपूर्वक होना चाहिए। उन्होंने संभाग में ठोस कचरा निस्तारण वाले स्थानों के बारे में जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।


संभागीय आयुक्त ने संभाग के जिलों में बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के संबंध में जानकारी ली और कहा कि इसके मैनेजमेंट में की गई कार्रवाई महज खानापूर्ती नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत अस्पतालों के यहां बार कोड वाली थैलियों का प्रयोग हो रहा है अथवा नहीं, इसकी जांच की जाए।

हालांकि, कई अस्पताल बार कोड वाली थैलियों का प्रयोग कर रहे हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग इसके निस्तारण की मानिटरिंग करता रहे। संभागीय आयुक्त ने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और हैंडलिंग एक्ट 1998 को संशोधित किए जाने के बाद वर्ष 2016 में सजा के प्रावधान कड़े कर दिए गए।

नए कानून में इधर-उधर कूड़ा-कचरा फेंकने पर पांच साल तक की जेल व जुर्माने का प्रावधान है। कुछ अस्पताल अपने मनचाहे तरीके से बायोमेडिकल वेस्ट का मैनेजमेंट करते हैं। जिन थैलियों का उपयोग किया जाता है,वह सादा ही हैं। किस अस्पताल का कूड़ा-कचरा सड़क पर फेंका जा रहा है, इस पर निगरानी रखी जाए। एक्ट का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाए।


संभागीय आयुक्त ने कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, प्रयोग किये गए बहु-स्तरीय प्लास्टिक पाउच और पैकेजिंग प्लास्टिक के संग्रहण की प्राथमिक जिम्मेदारी उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों की है, जो बाजार में उत्पादों को पेश करते हैं।

उन्हें अपने उत्पादों की पैकेजिंग में प्रयोग किये प्लास्टिक कचरे को वापस इकट्ठा करने के लिये एक प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता है, पर्यावरण विभाग संभाग में इस संबंध में ब्रांड मालिकों द्वारा क्या प्रयास किए हैं उसकी रिपोर्ट तैयार करें। उन्होंने इस संबंध में बने अधिनियमों की समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की पालना करवाने पर जोर दिया।

उन्होंने संभाग में डम्पिंग यार्ड, सीवरेज सिस्टम, ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति की भी जानकारी ली। बैठक में क्षेत्रीय उप निदेशक स्वायत्त शासन विभाग केएल सोनगरा ने संभाग में निकाय प्रशासन द्वारा ठोस कचरा प्रबंधन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, डम्पिंग यार्ड आदि की जानकारी दी। उपनिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग डाॅ. संदीप अग्रवाल तथा क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी प्रेमाराम ने विभाग के संबंधित जानकारी दी। बैठक में अतिरिक्त संभागीय आयुक्त इंदीवर दुबे उपस्थित थे।



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