राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आव्हान पर शुक्रवार को दी होलसेल ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन ब्यावर की ओर से भी शहर की कृषि उपज मंडी पूरी तरह से बन्द रहीं। अध्यक्ष राजेश तातेड़ ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बीते 5 जून को कृषि नीति के तहत अध्यादेश जारी किया है, उसी अध्यादेश के खिलाफ सांकेतिक हड़ताल रखी गई।
केन्द्र सरकार ने मंडी यार्डों के बाहर कृषि उपज के व्यापार पर मंडी शुल्क वसूली पर रोक लगाने के साथ ही किसानों से सीधी खरीद के चलते राजस्थान के मंडी यार्डों के व्यापारी एवं आढ़तियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही मंडी यार्ड केवल भवन बन कर रह जाएंगे। मंडी यार्ड के व्यापारी औसतन साढ़े चार प्रतिशत अतिरिक्त खर्च की वजह से मूल्य उसी हिसाब से दे पाते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं की नीलामी के कारण प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य मिलता है।
लेकिन यार्ड के खर्चों ने इस व्यापार को ग्रहण लगा दिया है। सरकार को अन्य राज्यों की तरह मंडी शुल्क आधा प्रतिशत कर देना चाहिए और किसान कल्याण शेष को खत्म कर दिया जाना चाहिए, तभी मंडी यार्ड के व्यापारी अधिकतम मूल्य दे पाएंगे। यदि सरकार ने इस अध्यादेश को वापिस लेने के साथ व्यापारियों की अन्य मांगों को पूरा नहीं किया तो व्यापारियों द्वारा मजबूरन मंडिया बन्द कर अनिश्चितकालीन हड़ताल करनी पड़ेगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी।
विरोध करने वालों में बालकिशन गांधी, महावीर, सुनील खटोड़, कार्तिक झंवर, शरद रावका, सिद्धार्थ चलानी, राजेश चंदानी, हरीश सोमानी आदि शामिल थे।
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