(विमल शर्मा) सीएम गहलोत खेमे में एकजुटता के बड़े बड़े दावों के बीच कहीं न कहीं डर भी नजर आ रहा है। जैसलमेर में अब तक 91 विधायक ही पहुंचे, वहीं कुछ खास मंत्री जयपुर में है जो सीएम गहलोत के करीबी है। लेकिन इन सबके बीच गहलोत खेमे का आंकड़ा 100-102 तक ही है। ऐसे में खतरा है। इसके तहत बाड़ेबंदी में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। किसी सेंधमारी की आशंका के चलते सभी विधायकों को जैसलमेर लाने के पीछे भी गहलोत खेमे का डर बताया जा रहा है।

जैसलमेर में जिस होटल में इन विधायकों को रखा है वहां सुरक्षा इतनी कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। होटल सूर्यागढ़ के 200 मीटर दायरे में मुख्य सड़क पर बेरिकेडिंग लगाए गए हैं। होटल के आगे से निकलने वाले हर वाहन को रुकवाकर पूछताछ करने के बाद ही जाने दिया जा रहा है।

विधायकों को निर्देश : अकेले में बात नहीं करेंगे
जैसलमेर आए सभी विधायक गहलोत के पक्ष में है। लेकिन बाड़ेबंदी के तहत उन पर पूरा विश्वास भी नहीं है। विधायकों को स्पष्ट निर्देश है कि वे एक दूसरे के कमरे में नहीं जाएंगे। अकेले में बैठकर बात नहीं कर सकेंगे। होटल के रेस्टोरेंट, गार्डन व लॉबी में एक साथ बैठकर बात कर सकते हैं।

होटलों की घेराबंदी
सियासी राजधानी जैसलमेर में होटल सूर्यागढ़ व गोरबंध पैलेस में मंत्री व विधायक ठहरे हुए हैं। दोनों होटलों को सुरक्षा बलों ने घेर रखा है। इतना ही नहीं होटल के अंदर भी खुफिया एजेंसियाें व पुलिस के अधिकारी तैनात है। चप्पे चप्पे पर सुरक्षा बंदोबस्त है।

बाहर निकलने की मनाही
किसी भी विधायक को बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। पिछले चार दिनों में यहां ठहरे विधायक व मंत्री शहर की तरफ नहीं आए हैं। केवल विश्वासपात्र तीन मंत्री ही बाहर निकलें है। जिसमें प्रमोद जैन भाया, बी डी कल्ला और भंवरसिंह भाटी शामिल है। शेष होटल में बाड़ेबंदी के तहत ही मौजूद है। बताया जा रहा है कि बिना सीएम की परमिशन के किसी को भी बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है।

इनको यहां आए चार दिन हो चुके हैं लेकिन एक भी विधायक बाहर नहीं आया है, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा इंतजाम कितने कड़े हैं।



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बाड़ेबंदी में विधायक (फाइल फोटो)
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