कारागृहाें में ज्यादातर काम ऑनलाइन हाेने के कारण अब तारीख पेशी से बंदियाें के फरार हाेने का खतरा नहीं रहा। उन्हें लाने-लेजाने की परेशानी भी खत्म हाे गई है। राज्य की जेलाें में काेराेना संक्रमण का डर भले ही बना हुआ है, लेकिन प्रशासनिक काम अब पहले ज्यादा आसान और सुविधाजनक हाे गए हैं।
न्यायालयाें में बंदियाें की व्यक्तिगत तारीख पेशी पूरी तरह बंद है। उन्हें जेल से ही वीडियाे कांफ्रेंसिंग के जरिये न्यायाधीशाें के समक्ष पेश किया जा रहा है। इससे उन्हें लाने-लेजाने की परेशानी ताे दूर हाे गई, साथ ही रास्ते में फरार हाेने की घटनाएं भी नहीं हाेंगी।
पुलिस गार्ड सहित गाड़ियाें की व्यवस्था, डीजल-पेट्राेल का खर्चा भी बच रहा है। बंदी के एक से ज्यादा जगह पेशी हाेने पर पुलिस गार्ड वारंट लेकर पहुंचते थे, लेकिन अब ई-मेल के जरिये आगामी तारीख पेशियां मिल रही हैं। बीकानेर जेल में हनुमानगढ़, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, नागाैर सहित अन्य राज्याें के भी बंदी हैं।
वहां से बंदियाें की रिहाई के आदेश हाेने के बावजूद जेल प्रशासन काे व्यक्तिगत या डाक से मिलने में दाे-तीन दिन की देरी हाे जाती थी। अब मेल के जरिये आदेश मिलते ही बंदियाें की तत्काल रिहाई हाेने लगी है। जेल में हाईकाेर्ट की रिट, रिप्लाय का काम और उनके आदेशाें का काम भी ऑनलाइन हाे रहा है।
वीसी के जरिये हाे रही बंदियाें की मुलाकात
जेल के बंदियाें की मुलाकात भी अब वीडियाे कांफ्रेंसिंग के जरिये करवाई जा रही है। इससे परिजनाें काे आने-जाने की परेशानी नहीं रही और खर्चा भी बचेगा। इसके अलावा जेल में केवल तीन परिजन ही बंदी से मिल सकते हैं, लेकिन वीसी के जरिये बंदी घर में माैजूद सभी लाेगाें से रूबरू हाेकर बात करता है। वह अपना घर, गली माेहल्ला देख भी सकता है।
- काेराेना काल में जेल का ज्यादातर काम ऑनलाइन हाे रहा है जाे सुविधाजनक साबित हुआ है। सरकार का खर्चा, मैनपाॅवर और समय की बचत हाे रही है। सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से अधिकांश काम हमेशा के लिए ऑनलाइन कर दिए जाने चाहिए। - परमजीतसिंह सिद्वू, जेल अधीक्षक
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