मुकदमाें की जांच करने वाले अनुसंधान अधिकारियाें की जवाबदेही तय हाेगी। जांच में लापरवाही बरतने वालाें के खिलाफ कार्यवाही हाेगी। बीकानेर रेंज के प्रभारी एडीजी (पुनर्गठन और नियम) हेमंत प्रियदर्शी ने जिले के पुलिस अधिकारियाें की क्राइम मीटिंग में आगाह करते हुए बताया कि पुलिस काे अपनी साेच बदलनी हाेगी।

मुकदमा दर्ज हाेने पर अनुसंधान अधिकारी उसमें एफआर या चालान पेश करने की मानसिकता बना लेता है। जबकि, पहले गंभीरता से जांच करनी चाहिए। साक्ष्य जुटाने चाहिए जिससे कि अपराधियाें काे सजा दिलाई जा सके। अधिकाशं मामलाें में चालान पेश करने के बाद आईओ फ्री हाे जाता है। ऐसा करने की बजाय उसे मुकदमाें की माॅनिटरिंग करनी चाहिए।

गवाहाें काे सुरक्षा का विश्वास दिलाना चाहिए जिससे कि वे पक्षद्राेही ना हाे सकें। हत्या, रेप-पाेक्साे एक्ट जैसे मुकदमाें में पूरी संजीदगी के साथ काम कर फाइल तैयार करनी चाहिए। एडीजी ने काेराेना काल में पुलिसकर्मियाें के स्वास्थ्य, ड्यूटी, अपराध और कानून-व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।

सर्किल सीओ ने अपने-अपने क्षेत्र के अपराधाें की स्थिति के बारे में बताया। मीटिंग में एसपी प्रह्लादसिंह कृष्णिया, एएसपी सिटी पवन कुमार मीणा, एएसपी ग्रामीण सुनील कुमार, पुलिस परामर्श एवं सहायता केन्द्र एएसपी किरण और सभी सर्किल के सीओ माैजूद थे।



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Negligence will not be done in the investigation of cases, accountability of research officers will be decided.
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