देश विषम परिस्थितियों से गुजर रहा है। सभी शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियां बंद हैं। कैंपस में स्टूडेंट्स नहीं हैं। नए एडमिशन की स्थिति साफ नहीं है, लेकिन एजुकेशन रुक ताे नहीं सकती। ऐसे में एजुकेशन सिस्टम काे अागे बढ़ाने का अब एकमात्र ऑप्शन है ऑनलाइन। इसकी भी दो पद्धतियां हैं- सिंक्रोनस और एसिंक्रोनस, जिसमें से एक काे हर संस्थान को अपनाना ही होगा।


ऑनलाइन एजुकेशन तभी सफल जब स्टूडेंट्स गंभीरता दिखाए- कुछ माह तक फिजिकल क्लासेज संभव नहीं हो पाएंगी। ऑनलाइन क्लासेज तभी सफल हो सकती है जब स्टूडेंट्स गंभीरता दिखाए। इस संबंध में स्टूडेंट्स व पैरेंट्स को ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि कोई भी संस्थान अपने स्टूडेंट्स के लिए व्यवस्थाएं तो कर देगा, लेकिन उन व्यवस्थाओं का सदुपयोग जरूरी है।

ऑनलाइन हो अथवा फिजिकल परीक्षा जरूरी- कक्षाएं चाहें ऑनलाइन हो अथवा फिजिकल। परीक्षा बहुत जरूरी है, इसीलिए आईआईटी ने अनोखी पद्धति से संस्थान के स्टूडेंट्स का एग्जाम भी लिया। बिना परीक्षा के प्रमोट करना उनके हिसाब से उचित नहीं हैं। इससे स्टूडेंट की स्किल निखरती है।

ऑनलाइन में टीचर्स स्टूडेंट्स कनेक्ट होना जरूरी
सिंक्रोनस : इस पद्धति में ऑनलाइन स्टूडेंट्स और टीचर्स कनेक्ट हो सकते हैं। यह उस स्थिति में संभव है, जब सभी स्टूडेंट्स व टीचर्स के पास पर्याप्त इंटरनेट कनेक्टिविटी हो। इस पद्धति में स्टूडेंट्स और टीचर्स ऑनलाइन क्लास में कनेक्ट होते हैं और एक-दूसरे को सुन सकते हैं। क्लास के दौरान ही प्रॉब्लम्स भी शेयर हो जाती है और उनका समाधान भी हाथोहाथ हो जाता है। इसके लिए कई सॉफ्टवेयर व एप भी हैं।


एसिंक्रोनस : टीचर्स ऑनलाइन वीडियो पोस्ट करता है और स्टूडेंट्स उस वीडियो को देखकर चैप्टर को समझने की कोशिश करता है। इसमें स्टूडेंट्स व टीचर्स का इंटरेक्शन नहीं हो सकता। वहीं पहले एजुकेशन मटीरियल उपलब्ध करवा देते हैं और उन पर स्टूडेंट्स अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करते हैं और उसका अगले वीडियो अथवा ऑनलाइन के माध्यम से समाधान कर लिया जाता है।

आईआईटी ने ऑनलाइन के हिसाब से सिलेबस ही बदल दिया

  • सीनेट में लिए निर्णय के आधार पर सितंबर से ऑनलाइन क्लास शुरू हो जाएंगी।
  • इंजीनियरिंग की शिक्षा प्रैक्टिकल के बगैर संभव नहीं, इसीलिए सिलेबस में बदलाव किया गया है।
  • पहले तीन माह तक थ्योरी क्लासेज होगी, इसके बाद प्रैक्टिकल की क्लासेज होगी।
  • परिस्थितियां नहीं सुधरीं तो तीन माह के बाद में स्टूडेंट्स को अलग-अलग ग्रुप में बुलाया जाएगा और प्रैक्टिकल करवाकर घर भेज दिया जाएगा।


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