प्रदेश में गुरुवार को कोरोना के अब तक के रिकॉर्ड 1793 रोगी मिले। इन्हें मिलाकर कुल संक्रमित 109473 हो गए। वहीं, पहली बार रिकवरी 90,000 के स्तर को पार कर गई। अब तक कुल 90,685 कोरोना संक्रमित ठीक हो चुके हैं।

यह कुल मरीजों का 82.83 प्रतिशत है। जयपुर लगातार भारी संक्रमण के विस्फोट से गुजर रहा है। गुरुवार को भी अब तक के सर्वाधिक 369 नए रोगी मिले। इनको मिलाकर कुल संख्या 16,408 हो गई।

राहत यह है कि जयपुर में रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या 10,000 के स्तर को पार कर गई और अब तक होने वाले 10159 है। इसी तरह भर्ती रोगियों की संख्या 17495 हो गई है।

वहीं, 14 लोगों की मौत हुई और अब तक कुल मौतें 1293 हो गईं। नई मौतों में जोधपुर में दो, उदयपुर सीकर, पाली, नागौर, कोटा, झुंझुनूं, जयपुर, श्रीगंगानगर, चूरू, चित्तौड़ बीकानेर व अजमेर का 1-1 शामिल है।

जयपुर में कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड

कोरोना का कम्युनिटी स्प्रेड है। अब लगातार बल्क में मरीज मिल रहे हैं। गुरुवार को 369 नए केस आए। कुल आंकड़ा 16,408 पहुंच गया है। एक मौत के साथ 305 लोग मर चुके हैं। मालवीय नगर, मानसरोवर, जगतपुरा में केस बढ़ते जा रहे हैं। सांगानेर में 36, मालवीय नगर में 38, मानसरोवर में 35, जगतपुरा में 27, झोटवाड़ा में 26 केस आए हैं। 15 दिन से केस कम नहीं हो रहे। लोग बेफिक्र दिखते हैं। न मास्क लगाने की सख्ती है ना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन। अब सख्ती की जरूरत है।
गोपालपुरा में 7, अजमेर रोड, झालाना, सी-स्कीम, महेश नगर, सोढ़ाला में 6-6, आदर्श नगर, पुरानी बस्ती, आमेर, रामगंज, ब्रह्मपुरी में 5-5, बस्सी, मुरलीपुरा में 8-8, चाकसू में 10, फुलेरा में 9, दूदू में 13, दुर्गापुरा में 20, गंगापोल, गोनेर रोड, जोबनेर, शास्त्री नगर में 3-3, ईदगाह, गुर्जर की थड़ी, टोंक फाटक में 4-4, आमेर रोड, सिविल लाइंस, जयसिंहपुरा खोर, हसनपुरा, गांधीनगर, लूनियावास, सुभाष चौक और टोंक रोड से 2-2, बगरू, बनीपार्क, बापू नगर, भांकरोटा, गोनेर, गोविंदगढ़, लालकोठी, राजापार्क, रामगढ़ मोड़, सीकर रोड, तिलक नगर, त्रिवेणी नगर से 1-1 केस सामने आए हैं।

आरयूएचएस -जयपुरिया में नहीं हैं सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर... एसएमएस में गंभीर मरीज भर्ती नहीं करेंगे

कोविड के बढ़ते मरीजों की संख्या और बिगड़ते हालात को काबू पाने के लिए आरयूएचएस और जयपुरिया अस्पताल में एसएमएस मेडिकल कॉलेज का स्टाफ भले ही लगाया जा रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों को एसएमएस में भर्ती नहीं करने से सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। वजह यह भी कि जिन आरयूएचएस और जयपुरिया अस्पतालों में गंभीर रोगियों के लिए कोई विशेष सुविधाएं नहीं हैं।

यहां तक कि इन दोनों अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी (कार्डियो, नेफ्रो, गेस्ट्रो, न्यूरो) के डॉक्टर्स ही नहीं हैं। यहां तक कि जयपुरिया अस्पताल में तो मेडिसिन के भी पांच ही डॉक्टर हैं। ऐसे में यहां सामान्य मरीजों को भी संभाला जा सकता है, इसमें भी संदेह है।
पहले आरयूएचएस को कोविड सेंटर बनाया गया है। मरीज बढ़ रहे हैं, आरयूएचएस में व्यवस्थाएं संभल नहीं रही थी तो जयपुरिया को बनाया गया और यहां बेड के साथ कुछ वेंटीलेटर और ऑक्सीजन सिलेंडर बढ़ाए गए। लेकिन स्टाफ की कमी पूरी नहीं हो पा रही थी। नतीजतन यहां भी आरयूएचएस और एसएमएस से मेडिसिन और एनेस्थीसिया का स्टाफ लगाया गया है।

लेकिन गंभीर रोगियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। आरयूएचएस में 700 और जयपुरिया अस्पताल में भले ही 500 बेड कर दिए गए हों, लेकिन ऑक्सीजन और वेंटीलेटर वाले बेड 400 ही हैं। मरीजों को कार्डियो की प्राब्लम होती है लेकिन दोनों ही अस्पतालों में न केवल कार्डियो, बल्कि गेस्ट्रो और नेफ्रो के भी डॉक्टर्स यहां मौजूद नहीं होते।
एसएमएस स्टाफ लगाना बेहतर लेकिन यहां भी तो शुरू हों : दोनों अस्पतालों में एसएमएस का स्टाफ लगाने के बाद बेहतर व्यवस्थाएं होने की उम्मीद है लेकिन सवाल यह कि गंभीर रोगियों के लिए एसएमएस को शुरू क्यों नहीं किया जा रहा। जबकि यहां अन्य स्टाफ के पास मरीज भी नहीं आ रहे हैं। ऐसे में कोविड मरीजों की जान बचाने के लिए शुरुआती दौर में ही यह कर देना बेहतर होगा।
आज नहीं तो कल करना ही होगा
जिस तेजी से गंभीर मरीज बढ़ रहे हैं और निजी अस्पतालों में भी बेड नहीं बचे हैं, उसे देखते हुए आज नहीं तो कल एसएमएस में गंभीर रोगियों को भर्ती करने की कवायद करनी ही होगी। अभी ही यह व्यवस्था की जाती है तो रोगियों की जान बचाना आसान होगा और हालात सुधर सकेंगे। यदि यहां मरीज भर्ती होते हैं तो सुपर स्पेशलिटी का भी फायदा खुद मेडिकल स्टाफ को मिल सकेगा।



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अब तक कुल 90,685 कोरोना संक्रमित ठीक हो चुके हैं।
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