कोरोना वायरस लगातार स्ट्रेन बदल रहा है। फिलहाल कोरोना की सातवीं पीढ़ी का वायरस सक्रिय है। एक्सपर्ट्स का कहना है यह खाड़ी देशों से शेखावाटी तक पहुंचा है। क्यूंकि पिछले दिनों बड़ी संख्या में खाड़ी देशों से कामगार यहां पहुचे। यह वायरस सीधे मरीज के फेफड़ों पर अटैक करता है। चपेट में आए मरीज के फेफड़े सफेद हो जाते है। फेफड़ों के छेद बिल्कुल बंद हो जाते हैं।

सांस लेने में तकलीफ होती है। ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण लगातार हालत बिगड़ती चली जाती है। वेंटिलेटर के जरिए मरीज की सांसों को सहारा देना पड़ता है। इस वायरस के चपेट में आए मरीज की इम्युनिटी अपने आप कम होती चली जाती है। अंततः मरीज की मौत हो जाती है। वायरस कितना खतरनाक है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अप्रैल से जुलाई तक सीकर जिले में मरीजों का मौत का आंकड़ा 14 था।

वहीं पिछले डेढ़ महीने में 20 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा खास बात यह है कि भी इस वायरस के चपेट में आए मरीज में लक्षण दिखने लगते हैं। जबकि शेखावाटी अंचल में शुरुआत में जो वायरस था, वो कमजोर था। इसलिए मरीजों में लक्षण नहीं दिखते थे। इसलिए मरीज जल्दी रिकवर कर लेता था।
एक्सपर्ट्स व्यू : पहले जो मरीज आते थे, उनके फेफड़े इतने खराब नहीं होते थे, इस वायरस में लक्षण भी दिख रहे
रेडियोलॉजिस्ट डॉ विजय मूंड का कहना है कि फिलहाल पॉजिटिव मरीज के फेफड़ों की जो दशा मिल रही है। वो ज्यादा खराब है। पहले जो मरीज आते थे, उनके फेफड़ों की दशा ऐसी नही मिलती थी। कोरोना वायरस से डैमेज हुए फेफड़े रिकवर नहीं कर पाते है। आरटी-पीसीआर जांच के बजाए सीटी स्कैन जांच की वैधता ज्यादा है। सीटी स्कैन जांच से मरीज के फेफड़ों की सही दशा का पता चल पाता है, वहीं आरटी पीसीआर जांच से सिर्फ ये पता चलता है कि मरीज पॉजिटिव है या निगेटिव।
फिजिशियन डॉ रघुनाथप्रसाद का कहना है कि कोरोना वायरस की प्रकृति के संबंध में दुनिया में फिलहाल कोई कुछ नहीं कह सकता। लेकिन यह तय है कि वायरस लगातार बदल रहा है। अब लक्षण वाले मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। पहले ऐसा नहीं था। अब पॉजिटिव मरीजों की मोर्टिलिटी भी बढ़ी है। शुरुआत में जो वायरस था, वो कमजोर था। अब जो हैं, वो मरीज के लिए ज्यादा खतरनाक है। वायरस की प्रवृत्ति बदल रही है, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

अगस्त में हर दूसरे दिन 1 मौत
माह मौतें
अप्रैल 3
मई 2
जून 1
जुलाई 8
अगस्त 15
सितंबर 5

आरटी पीसीआर जांच से सिर्फ पॉजिटिव होने का पता चलता है संक्रमण के स्तर की जानकारी के लिए सीटी स्कैन कराना जरूरी स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन के मुताबिक फिलहाल संदिग्ध मरीजों की आरटी पीसीआर जांच कर संक्रमण का पता लगाया जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरटी पीसीआर जांच में सिर्फ यह पता चलता है कि मरीज पॉजिटिव है या निगेटिव।

मरीज में वायरल लोड कितना है। इसकी जानकारी नही मिलती। इसलिए मरीज की हालत बिगड़ी है तो वेंटिलेटर का सहारा दिया जाता है। इसके बाद उसके फेफड़ों की जांच की जाती है, तब तक काफी देर हो जाती है। विशेषज्ञ का मानना है कि आरटी पीसीआर जांच की वैधता 70 फीसदी तक है। सीटी स्कैन से ही संक्रमण के स्तर की जानकारी मिल सकती है।



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संक्रमित व्यक्ति के फेफड़े
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