जीने की उम्मीद छोड़ चुके एक युवक को सेठ जीएल बिहाणी सनातन धर्म शिक्षा ट्रस्ट के माध्यम से नया जीवन मिला है। ट्रस्ट ने कोरोना काल में इस युवक को न केवल गंभीर बीमारी से मुक्ति दिलाई बल्कि आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार को कर्ज के दलदल में फंसने से बचा लिया। यह कहानी है दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले परिवार के एक सदस्य संजय की।
कुंज विहार (वार्ड 10) के यासीन खान के तीन बेटों में सबसे बड़े संजय (24) को चार साल पहले अल्सर की शिकायत हुई। रंग-रोगन का काम करने वाले इस युवक पर बीमारी हावी हुई तो काम भी छूट गया। खाना-पीना बंद होने से वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया। कमीशन पर सिलाई का काम करने वाले यासीन खान की आमदनी इतनी नहीं
थी कि बेटे का इलाज किसी अच्छे निजी अस्पताल में करवा सके। ऐसी स्थिति में संजय का ऑपरेशन बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में करवाया गया। ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक तो संजय सही रहा। लेकिन उसके बाद खाना-पीना छूट गया। इस बीच लॉकडाउन शुरू होने से यासीन खान को भी कमीशन पर सिलाई का काम मिलना बंद हो गया। बेटे के लगातार गिरते स्वास्थ्य से पूरा परिवार चिंतित था परंतु माली हालत ऐसी थी कि उपचार करवाना तो दूर उपचार के बारे में सोच भी नहीं सकते थे।
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