एक ओर जेडीए-यूडीएच आमजन से बकाया वसूलने के लिए सीज, कुर्की की कार्रवाई करती है, जबकि सेंट्रल पार्क स्थित सरकारी भूमि पर बने गोल्फ क्लब से लीज वसूलने के लिए होने वाले करार तक को फाइनल नहीं किया जा रहा।

2007 से बाद से गत बीजेपी सरकार के कार्यकाल तक 5 बार एमओयू के ड्राफ्ट बने, लेकिन उनको अंतिम रूप नहीं दिया गया। करार के लिए क्लब कमेटी पर भी दबाव बनाए गए, 2017 में क्लब की ओर से भी एमओयू का ड्राफ्ट बना, लेकिन फिर सरकार बैकफुट पर आ गई।

उधर आज तक तक कोई 40 एकड़ जमीन पर बने क्लब में लग्जरी और सुविधाओं के लिए जैसे-जैसे निर्माण बढ़े, उन पर भी जेडीए-यूडीएच बायलॉज के साथ नियमों की पालना नहीं करा पाया। ज्यादा से ज्यादा नोटिस की कार्रवाई जरूर की गई, लेकिन इसके बावजूद काम पूरे हुए।

इसके पीछे किसके हित साधे गए? इसकी भी कोई जांच नहीं हो पाई। बीजेपी सरकार में 20 लोगों को सदस्यता के मामले में भी खूब हो-हल्ले हुए। जेडीसी और एसीएस मूकदर्शक बने तो तत्कालीन यूडीएच मंत्री तक शिकायतें हुईं। इस पर उन्होंने जांच कराकर कार्रवाई की जो बात कही, वो भी थोथी ही साबित हुई। यही हाल अब तक बदस्तूर जारी है। जांच का विषय नोटिस, कार्रवाई के नाम दबाव बनाकर अब तक बने सदस्यों का है।

नाबालिगों की सदस्यता के मामले उठे

बीजेपी सरकार के शुरुआती कार्यकाल में जेडीए ने सदस्यता से जुड़े मामलों पर जानकारी ली तो पता चला 1850 सदस्य हैं। 800 से ज्यादा लोग कतार में हैं। नाबालिगों तक को सदस्यता देने के विवाद आए, जिन पर एक्शन नहीं हुआ। सितंबर 2016 में जेडीए की बगैर स्वीकृति रिसेप्शन, हट का काम शुरू हुआ तो जेडीए नोटिस देकर रोका।



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