कोरोना महामारी के दौरान सभी छात्रों को ई-लर्निंग और ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से जोड़ कर नियमित कक्षाएं और गतिविधियों को बढ़ाने का काम हिंदुस्तान जिंक कर रहा है। शिक्षा संबल कार्यक्रम में ग्रामीण छात्रों के परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए विषय अध्यापक उपलब्ध कराना, ऊंची उड़ान कार्यक्रम में आईआईटी की कोचिंग, उच्च शिक्षा के लिए सुविधा आदि शामिल हैं।
माध्यमिक शिक्षा राजस्थान के सहायक निदेशक सीएसआर दिलीप परिहार ने बताया कि कौशल विकास या आंगनवाडी से लेकर स्कूल शिक्षा तक राजस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों से राज्य ही नहीं वरन देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने बताया कि ग्रामीण छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। शिक्षा संबल के माध्यम से 2007 से एक ऐसा मंच प्रदान किया है जो ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने और भविष्य में देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़ने के उनके सपने को पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
इन 5 जिलों में चल रही विभिन्न शिक्षा योजनाएं
राजस्थान के 5 जिलों चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमंद, अजमेर और उदयपुर के 64 से अधिक राजकीय स्कूलों में ये योजनाएं जारी हैं जिससे इस वर्ष, 7,000 से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं। अब तक कुल 68 हजार को फायदा मिला है। इसके अलावा स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी इन प्रोग्राम्स का फायदा दिखाई दे रहा है। पिछले पांच सालों में 10वीं का पास प्रतिशत 64 से 80 तथा प्रथम श्रेणी का 14 से बढ़कर 22 प्रतिशत हुआ है।
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