कोरोनाकाल यूं तो सभी के लिए नुकसान का सौदा साबित हुआ है, लेकिन मत्स्य यूनिवर्सिटी कोरोनाकाल में भी फायदे में रही है। यूनिवर्सिटी में इस साल कोरोना वायरस के कारण स्नातक प्रथम वर्ष, द्वितीय वर्ष और स्नातकोत्तर प्रीवियस की परीक्षाएं निरस्त करते हुए छात्रों को सीधे आगामी वर्ष में प्रमोट कर दिया गया। नतीजा यह सामने आया कि यूनिवर्सिटी का ना तो परीक्षा कराने का खर्चा आया और ना ही कॉपी जांचने का खर्च हुआ।

सीधे तौर पर करीब 13 करोड़ 16 लाख रुपए यूनिवर्सिटी के खजाने में मिल गया। यही नहीं पिछले सात महीने से यूनिवर्सिटी इस रकम का ब्याज भी कमा चुकी है। अब महत्वपूर्ण यह है कि आगामी दिनों में वर्ष 2021 की परीक्षाओं के आवेदन भरे जाने हैं। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि आखिर इस पैसे का क्या होगा। क्या छात्रों से फीस का पैसा दुबारा से लिया जाएगा या उन्हें यह पैसा लौटाया जाएगा या फिर यूनिवर्सिटी इस वर्ष की फीस में इस पैसे को एडजेस्ट करेगी।

13 करोड़ से ज्यादा की यह रकम अकेले यूनिवर्सिटी में भरे गए स्नातक प्रथम, द्वितीय वर्ष और स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के आवेदकों की ही है। इसमें स्नातक तृतीय वर्ष और स्नातकोत्तर फाइनल व अन्य फाइनल ईयर की परीक्षाओं के आवेदकों की संख्या व उनकी फीस शामिल नहीं है।

यह ठीक है कि परीक्षाएं नहीं हुई हैं, लेकिन खर्चे ताे सभी हाे रहे हैं। एग्जाम एक का हाे या साै का, सेटअप ताे पूरा करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी काे इन बच्चाें का रिजल्ट ताे तैयार करना ही पड़ेगा। इन्हें मार्कशीट भी देनी पड़ेगी। इसके अलावा काेविड में जाे अलग से बच्चाें की परीक्षाएं कराई जाएंगी उनका अतिरिक्त खर्च भी यूनिवर्सिटी काे उठाना पड़ेगा। सभी जगहाें पर सभी काम कराए जा रहे हैं। चूंकि परिस्थितियां एक जैसी हैं, इसलिए सभी यूनिवर्सिटी के लिए निर्णय भी एक जैसा हाेना है। इसका इंतजार कर रहे हैं।
- प्राे. जेपी यादव, वीसी, मत्स्य यूनिवर्सिटी

66 हजार 900 विद्यार्थियों ने भरे थे यूनिवर्सिटी के आवेदन
मत्स्य यूनिवर्सिटी में 2020 की परीक्षा के लिए 66 हजार 900 विद्यार्थियों ने आवेदन किए थे और फीस जमा कराई थी। इनमें बीए प्रथम वर्ष के करीब 28 हजार, बीए द्वितीय वर्ष के 18 हजार, बीएससी प्रथम वर्ष के 5 हजार, बीएससी द्वितीय वर्ष के 4 हजार, बीकॉम प्रथम वर्ष के करीब 1200 और द्वितीय वर्ष के करीब 1200 स्टूडेंट शामिल थे। इनके अलावा करीब 7 हजार स्टूडेंट स्नातकोत्तर प्रीवियस के अलग-अलग विषय के शामिल थे।

प्राइवेट स्टूडेंटस से अलग से लिया विमर्श शुल्क : आवेदन भरवाते समय प्राइवेट विद्यार्थियों से यूनिवर्सिटी ने विमर्श शुल्क के नाम से 1 हजार रुपए भी लिए थे। कोरोना के चलते न तो इन प्राइवेट विद्यार्थियों को विमर्श नसीब हुआ और न ही परीक्षा में शामिल हो पाए। यूनिवर्सिटी ने प्रथम वर्ष का नियमित विद्यार्थियों का शुल्क 1320 रुपए और स्वयंपाठी का शुल्क 3360 रुपए निर्धारित किया हुआ था।



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66 हजार 900 विद्यार्थियों ने भरे थे यूनिवर्सिटी के आवेदन
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