काेराेना काल में जिला न्यायालय और अधीनस्थ अदालताें में मुकदमाें की नियमित सुनवाई छह माह से ज्यादा समय तक बाधित हाेने से लंबित मुकदमाें का आंकड़ा पहली बार 91 हजार पार कर गया है। लेकिन इस आंकड़े का दूसरा पहलू देखें ताे बीते छह माह में करीब 15 हजार 500 मुकदमे पेश हुए और इनमें से 10 हजार 750 की सुनवाई की जाकर निस्तारण कर दिया गया।
काेराेनाकाल में मुकदमाें के निस्तारण के यह इसलिए ज्यादा लग रही है क्योंकि इसमें 80 प्रतिशत मामले फाैजदारी प्रकरणाें से जुड़े है जिसमें जमानत अर्जियाें सहित सुपुर्दगीनामे और जुर्माने से जुड़े मामले हैं। सिविल मामलाें का निपटारा बेहद कम हुआ है।
संक्रमण से बचाव के लिए पिछले कई महीनाें से जिला न्यायालय में बेहद जरूरी मामलाें में ही सुनवाई की जा रही थी। फिजिकल अपीरियेंस नहीं हाेने और ऑनलाइन सुनवाई के दाैरान भी जिला न्यायालय में मुकदमाें का आना थमा नहीं और न ही सुनवाई रुकी लेकिन मुकदमाें की नियमित सुनवाई नहीं हाे पाई और अंबार बढ़ गया है, इसका असर आने वाले दिनाें में देखने काे मिलेगा। लाॅकडाउन पीरियड में जिला न्यायालय व अधीनस्थ अदालताें में करीब 2100 मुकदमे ही पेश हुए और इनमें से 1450 का निस्तारण हुआ।
यह जमानत अर्जियाें सहित सुपुर्दगीनामे पर वाहन आदि छाेड़ने और जुर्माने से जुड़े मामले थे। लाॅक डाउन खत्म हाेने के बाद एकाएक मुकदमाें का अंबार लगना शुरू हुआ और इस दाैरान करीब 13 हजार 500 मुकदमे पेश हाे गए वहीं इनमें से करीब 9 हजार 200 का निपटारा हाे गया। 30 सितंबर काे जिला न्यायालय में लंबित मुकदमाें की कुल संख्या 91 हजार से ज्यादा थी।
बीते छह माह में जिस तरह लंबित मुकदमाें में तारीख पेशियाें के अलावा काेई काम नहीं हुआ उससे अदालती कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है और कानूनी जानकाराें का मानना है कि इस व्यवस्था काे पटरी पर लाने में लंबा समय लगेगा। 19 अक्टूबर से हालांकि मुकदमों की नियमित सुनवाई शुरू हो गई है लेकिन सामान्य दिनों में जिस तरह अदालतें लगती थी उसमें अभी समय लगेगा।
लंबित मुकदमोंं की ये है स्थिति (30 सितंबर 2020)
- सिविल केस - 28 हजार 500
- क्रिमिनल केस - 63 हजार
- कुल लंबित केस- 91 हजार 500
काेराेनाकाल की शुरुआत की स्थिति (1 अप्रैल 2020)
- सिविल केस - 26 हजार 400
- क्रिमिनल केस - 60 हजार 300
लाॅकडाउन में मीटर डाउन
- मुकदमे पेश हुए - 2100
- निस्तारण - 1450
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