शारदीय नवरात्र पर ग्रहीय आधार पर विशेष संयोग बन रहा है। शनि मकर में और गुरु, धनु राशि में रहेंगे। यह संयोग नवरात्र पर्व को कल्याणकारी बनाता है। जब गुरु शनि स्वराशि के होते हैं, तब पूजा-पाठ का पूर्ण फल मिलता है। इस समय प्रॉपर्टी, वाहन, कीमती वस्तुओं की खरीद भी शुभ फलकारी मानी है।
ज्योतिषाचार्य अमित जैन ने बताया कि नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं का मां का रूप मानकर पूजन किया जाता है। इसके साथ ही महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा के बाद हवन किया जाता है। अष्टमी, नवमी पर लोग कुल देवी की पूजा करते हैं। शारदीय नवरात्र में इस बार दुर्गाष्टमी, नवमी और दशहरा को लेकर लोग दुविधा की स्थिति है। आपको बता दें कि पंचांग के आधार पर तिथियां अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों की तरह 24 घंटे की नहीं होती हैं। ये तिथियां 24 घंटे से कम और ज्यादा हो सकती है।
कई बार ये तिथियां एक ही तारीख को आ जाती हैं। इससे दो व्रत या त्यौहार एक ही दिन आ जाते हैं। लेकिन इस बार नवरात्र की अष्टमी, नवमी और दशमी तिथि को लोगों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इस बार अष्टमी 23 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 57 मिनट शुरू होगी जो 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। महानवमी 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 से शुरू होगी, जो 25 अक्टूबर सुबह 07 बजकर 42 मिनट तक रहेगी। महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
विजयादशमी 26 को, लेकिन दशहरा 25 को
दशमी 26 अक्टूबर की मनाई जाएगी, जबकि दशहरा 25 अक्टबूर, रविवार को है। दशहरा पर्व अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूर्योदय के बाद दसवें मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती। यदि दशमी दो दिन के अपराह्न काल में हो तो दशहरा त्यौहार पहले दिन मनाया जाएगा।
ऐसे में इस बार जहां 25 अक्टूबर को नवमी सुबह 7.42 तक रहेगी। वहीं इसके बाद दशमी शुरु हो जाएगी, जबकि यह दशमी तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजे तक ही रहेगी। इसके चलते दशहरा 25 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा।
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