कोरोना की आड़ में रोडवेज प्रबंधन ग्रामीण क्षेत्रों में बसें चलाने में अपनी मनमानी कर रहा है। लॉकडाउन में बंद रोडवेज बसों को सरकार ने अनलॉक में चलाने की अनुमति दे दी है, फिर भी सिरोही डिपो की ओर से रेवदर, भीनमाल और जालोर रूट पर अभी तक बसें नहीं चलाई जा रही है।

इन रूट पर बसों को चले हुए करीब 6 महीने का समय हो चुका है, जबकि बड़े शहरों उदयपुर, जोधपुर और जयपुर रूट पर हर घंटे व आधे घंटे के अंतराल में बसें दौड़ रही हैं। रोडवेज बसें नहीं चलने से इस रूट पर अब निजी वाहनों की मनमानी शुरू हो गई है। निजी वाहन यात्रियों से दोगुना किराया वसूल रहे हैं और कोरोना गाइडलाइन का पालन भी नहीं कर रहे हैं।

लॉकडाउन से पहले भीनमाल रूट पर 8 बसें, रेवदर रूट 7 बसें और जालोर रूट पर 6 बसें चल रही थी,। लेकिन अब जालोर रूट पर एक भी बस नहीं चल रही। इधर, भीनमाल और रेवदर रूट पर नाममात्र के लिए सिर्फ 2-2 बसें चलाई जा रही हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को मजबूरन दुगुना किराया देकर निजी वाहनों में सफर करना पड़ रहा है।

लॉकडाउन से पहले भीनमाल आठ, रेवदर सात और जालोर के लिए संचालित हो रही थी छह राेडवेज बसें
लॉकडाउन से पहले भीनमाल रूट पर आठ बसें, रेवदर रूट पर सात और जालोर रूट पर छह बसें चलती थी। भीनमाल रूट पर जावाल, बरलूट, कालंद्री, रामसीन जैसे कस्बे हैं, जहां से रोजाना बड़ी संख्या में लोग जिला मुख्यालय पर आवाजाही करते हैं। रेवदर रूट पर मंडार, अनादरा, कृष्णगंज, सिंदरथ और पावापुरी जैसे कस्बे हैं।

रेवदर उपखंड मुख्यालय यहां सिरोही की दूरी 70 किलोमीटर तक है, फिर भी बसें कम चलाई जा रही है। लोकसभा क्षेत्र और पड़ोसी जिला जालोर के लिए एक भी बस नहीं है। इस रूट पर भी जावाल, बरलूट, वराडा, सियाणा, आकोली, बागरा कस्बे पड़ते हैं और यहां लोग इलाज समेत विभिन्न कामों के लिए सिरोही आते हैं।

भीनमाल व जालोर रूट के लिए बसें नहीं होने से सवेरे 11 बजे रोडवेज की बुकिंग खिड़की पर लगा ताला।

बड़े शहरों के लिए हर घंटे बस, ग्रामीण रूट पर यात्रीभार कम इसलिए बसें बंद
रोडवेज प्रबंधन ने अपनी रेवेन्यू को देखते हुए बड़े शहरों के लिए सभी बसें पहले की समय सारणी के अनुसार शुरू कर दी है। सिरोही डिपो की ओर से उदयपुर रूट पर सबसे ज्यादा 7 बसें चलाई जा रही हैं। जोधपुर रूट पर 6 बसें और जयपुर रूट पर 2 बसें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा आबूरोड, उदयपुर, जोधपुर व जयपुर डिपो की बसें भी इन मार्गों पर चल रही है।

इस लिहाज से इन मार्गों पर हर घंटे यात्री के लिए बस की सुविधा है। लॉकडाउन के बाद ग्रामीण रूटों पर यात्रीभार कम हुआ तो रोडवेज बस प्रबंधन ने इस रूट की बसों को भी बंद कर दिया। हालात यह है कि पिछले 6 महीने से इन रूट पर बसें नहीं चली है।

रोडवेज प्रबंधन का दावा, ड्राइवर-कंडक्टर नहीं होने से बंद करनी पड़ी बसें
इस मामले में सिरोही डिपो के मुख्य प्रबंधक हेमंत कुमार से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बताया कि उनके पास ड्राइवर व कंडक्टर नहीं होने से बसें बंद करनी पड़ी। सिरोही डिपो में अभी 13 बसें पड़ी है, जिसे चालक व परिचालक नहीं होने से नहीं चलाया जा रहा।

इस पर भास्कर ने सवाल किया कि फिर उदयपुर, जोधपुर व जयपुर रूट पर ज्यादा बसें कैसे चलाई जा रही है। मुख्य प्रबंधक ने बताया कि 30 रुपए प्रति किलोमीटर की रेवेन्यू के हिसाब से इन मार्गों पर बसें चल रही है। ऐसे में उन्हें कैसे बंद कर सकते है। उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि 15-15 कंडक्टर-ड्राइवर मिलने पर समस्या का समाधान हो जाएगा।

लॉकडाउन से पहले

ग्रामीण रूट
80 से 85%
शहरी रूट
90 से 95%

अनलॉक के बाद

ग्रामीण रूट
40 से 45%
शहरी रूट
60 से 65%

अब अनलॉक में यह स्थिति

रेवदर भीनमाल जालोर
6:00 बजे 9:00 बजे 00
8:00 बजे 1.30 बजे 00
11:00 बजे 00 00
1.30 बजे 00 00



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रोडवेज बस की इंतजार में बैठे भीनमाल, जालोर व रेवदर रूट पर जाने वाले यात्री।
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