कोरोना वायरस से जंग में कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग से केवल संक्रमित बल्कि संपर्क में आने वालों की पहचान कर बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। पॉजिटिव आने पर छिपाना खतरनाक साबित हो सकता है। हाल ही में फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे राजनेताओं ने जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही वाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर पर संपर्क में आने वालों को जांच कराने की अपील की है।
इससे सही समय पर वायरस का पता लगने पर लोगों को मौत के मुंह से बचाया जा सकता है। पिछले दिनों विदेशों से आने वाले लोग वायरस के लक्षण होने के बावजूद छिपा रहे थे। यह भी बताने से डर रहे थे कि वे कहां गए और किस-किस से मिले। कोरोना वायरस फेफड़ों तक पहुंचने पर घातक सिद्ध हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति से 20 से 30 मिनट तक लगातार बात करने से भी कोरोना फैल सकता है। ऐसे में कम से कम बात करने के साथ ही 2 से 6 फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए।
भास्कर की अपील
पॉजिटिव आने पर सोशल मीडिया पर सूचना दें, जिससे संपर्क में आने वाले भी अलर्ट हो सकें, छिपाना खतरनाक साबित हो सकता है।
कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग से ऐसे खोजा संक्रमित मरीजों को
43 हजार संक्रमित : चिकित्सा विभाग की ओर से जयपुर, जोधपुर, भीलवाड़ा, कोटा, बीकानेर, सीकर, अलवर जैसे अनेक जिलों में 43 हजार पॉजिटिव मिलें। लक्षणों के आधार पर साढ़े 3 लाख लोगों के संपर्क में आने वालों के नमूने लेकर जांच कराने पर 43 हजार संक्रमित मिले।
क्या है कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग
किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोगों की मॉनिटरिंग करने के प्रोसेस को कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग कहते है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन रखा जाता है। किसी व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण दूसरों को आसानी से हो सकता है। संक्रमित के सीधे संपर्क में आने वालों से संक्रमित का अधिक खतरा होता है।
ऐसे की जाती है कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग
1. संपर्क की पहचान : संक्रमित से किन-किन लोगों के संपर्क में आए। क्या-क्या किया। कहां कहां गए। तुम्हारे साथ रहने वाले लोग किन जगहों पर गए।
2. सूची बनाना : संपर्क में आने वालों को सूचना देकर बताया जाता है कि उन्हें खुद को आइसोलेट करना होगा। लक्षण दिखने पर मेडिकल टीम से संपर्क करने तथा बीमारी की रोकथाम के बारे में जानकारी दी जाती है।
3. फॉलोअप : संपर्क में आने वालों का अधिकारी नियमित रूप से सपंर्क में रहकर लक्षणों पर निगरानी करते है। वायरस को रोकने के लिए अनिवार्य है।
एक्सपर्ट पैनल
डॉ.सुधीर भंडारी (एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य), मेडिसन के सीनियर डॉ. रमन शर्मा, डॉ.अार.एस. छिपी (अारसीएच निदेशक), डॉ. अजीत सिंह (अारयूएचएस कोविड प्रभारी), डॉ.मोनिका राठौड़, डॉ.पुनीत सक्सेना, डॉ. एन.बी.राजोरिया।
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