समीपवर्ती ग्राम शफीपुरा के ग्राम वासियों को आने वाले दिनों में पेयजल की भारी समस्या से जूझना पड़ेगा। मानसून की विदाई के साथ ही यहां के पेयजल के प्रमुख स्त्रोत्र कस्बे का तालाब नहीं भरने से लोगों का चिंतन स्वाभाविक है।
स्थानीय निवासी श्रीमन मीणा ने बताया कि इस बार औसत से भी कम वर्षा होने के कारण तालाब में पानी की आवक नहीं के बराबर हुई है। तालाब का पानी सूख जाने के बाद जो पीने के पानी के कुए हैं उनका पानी भी समाप्त हो जाता है ऐसी परिस्थिति में लोगों को आने वाले समय में बूंद-बूंद पानी को मोहताज होना पड़ सकता है। नहाने धोने तथा हजारों मवेशी तालाब भरोसे। लोगों ने बताया कि गांव के हजारों फालतू मवेशी इसी तालाब का पानी पीते हैं तालाब का पानी समाप्त हो जाने के बाद लोगों के सामने विशेषकर मवेशियों को
लेकर भारी पेयजल संकट से रूबरू होना पड़ेगा।
2 किमी दूर से लाती है महिलाएं पीने का पानी। शफीपुरा गांव लगभग 3 किलोमीटर लंबाई में बसा हुआ है। हालांकि कस्बे को लगभग 3 साल पूर्व बानोर जल प्रदाय योजना से जोड़कर पाइप लाइन द्वारा एक कुएं में पानी पहुंचाया जा रहा है इसी कुएं से कस्बे के सभी बाशिंदे पीने के पानी भरकर ले जाते है।
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