(सादिक अली) नए काेर्स शुरू करके विद्यार्थियाें की संख्या बढ़ाने की कवायद करने वाली एमडीएस यूनिवर्सिटी में कई विषय की पढ़ाई बंद हाेने की कगार पर पहुंच गई है। इसमें सबसे प्रमुख आर्ट्स और काॅमर्स हैं। अब तक पॉपुलेशन स्टडी में शून्य और संस्कृत में महज दाे आवेदन आए हैं। इन विषयाें में आवेदन नहीं हाेने के पीछे बड़ा कारण छात्रसंघ चुनाव का नहीं हाेना भी बताया जा रहा है।
यूनिवर्सिटी में पीजी काेर्सेज में 20-20 सीटें हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 16 अगस्त काे एडमिशन के लिए पाेर्टल शुरू किया था। आखिरी तारीख 20 सितंबर तक थी, लेकिन फाइनल ईयर की परीक्षाओं के कारण प्रवेश प्रक्रिया पर राेक लग गई।
छात्रसंघ चुनाव नहीं हाेने से ही बढ़ा संकट
राेचक तथ्य है कि यूनिवर्सिटी के इन विषयाें पर बंद हाेने का संकट छात्रसंघ चुनाव की वजह से बना है। काेविड-19 के चलते इस सत्र में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसे में यहां किसी भी छात्र संगठन ने हार जीत के लिए काेई कवायद नहीं की, लेकिन इससे पहले छात्र संघ चुनाव हाेने पर छात्र नेता अपने वाेट बढ़ाने के लिए विद्यार्थियाें का प्रवेश ऐसे ही विषयाें में कराते रहे हैं, जिनमें प्रवेश भी आसानी से मिल जाए और नियमित ताैर पर भी आने से बचा जा सके। लेकिन इस बार चुनाव नहीं हाेने से यूनिवर्सिटी के यह विषय बंद हाेने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
विषय बंद हाेने से बचाने की कवायद
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस विषयाें की सीटाें पर प्रवेश निर्धारित अंकाें तक करने के लिए 26 सितंबर से फिर पाेर्टल शुरू किया है। इसकी आखिरी तारीख भी फाइनल के परिणाम आने तक की गई है। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रशासन का मानना है कि इन सीटाें पर आवेदन आ जाएंगे, लेकिन स्थिति कुछ और ही बयां कर रही है। विशेषज्ञाें का कहना है कि किसी भी विषय के संचालन के लिए कम से कम 50 फीसदी सीटाें पर प्रवेश जरूरी है। इससे कम हाेने पर विषय के संचालन में नियमानुसार दिक्कत आती है।
इन विषयों पर बंद हाेने का संकट
आर्ट्स संकाय में एमए हिंदी में 20 सीटाें की तुलना में 7 ही आवेदन आए हैं। जबकि कम से कम 10 प्रवेश हाेना जरूरी है। पॉपुलेशन स्टडी में एक भी प्रवेश अब तक नहीं हुआ है, सभी 20 सीटें खाली हैं। इसी तरह संस्कृत वाड्ग्मय में भी 20 सीटाें में से महज 2 आवेदन हुए हैं। काॅमर्स संकाय में ईएफएम में 20 सीटें हैं, लेकिन आवेदन केवल 6 जमा हुए हैं। वहीं एबीएसटी में भी 6 आवेदन ही आए हैं।
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