राजेंद्र राठौड़ के हमले के जवाब में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो कृषि बिल लाई है वह उन्होंने यूरोप, अमरीका के कानूनों को कट कॉपी पेस्ट करके देश में लाए हैं। उन्होंने कहा कि वहां वालमार्ट जैसे पूंजीपतियों की ताकत बढ़ाने के लिए उन लोगों ने व्यवस्था की, वहीं यहां अडाणी और अंबानी के लिए की गई है। उन्होंने कहा कि आज अमरीका में ये स्थिति है कि किसान जो मक्का बेच रहे हैं उसकी कीमत उन्हें सन 1972 की कीमत से भी कम मिल रही है। चौधरी ने कहा कि अमेरिका बैंकों द्वारा किसानों को दिया गया 31 लाख करोड़ रुपए डूबे हुए हैं।

चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार जो कृषि बिल लाई उसका विरोध कांग्रेस ही नहीं बल्कि इनके सहयोगी दल भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन बिलों को लाने की मांग किसी राज्य नहीं की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही यह फैसला किया था कि एमएसपी से ऊपर कोई राज्य सरकार बोनस नहीं दे सकती।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुना करने की बात जरूर कर रही है,लेकिन फैसला उसका उल्टा हो रहा है। चौधरी ने कहा कि गुजरात व पंजाब में किसानों और पेप्सिको के बीच विवाद हुआ था। जब भाव ज्यादा था तब तो आलू खरीद लिया लेकिन भाव कम हुआ तो तर्क दिया गया कि आलू की साइज कम है, इसलिए नहीं खरीद सकते। उन्होंने कहा कि या तो आपको अडाणी-अंबानी की तरफ रहना होगा या किसानों की तरफ।

बिल किसान विरोधी, किसान मजदूर ही रह जाएगा: कटारिया

कृषि मंत्री लालचंद कटारिया

कृषि विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र की भाजपा सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा लाए तीनों कृषि बिल किसान विरोधी हैं। इन बिलों से किसान मजदूर बनकर रह जाएगा व बड़ी-बड़ी कंपनियां अनुबंध के आधार पर किसानों की जमीन लेकर मनमाने तरीके से खेती करवाएगी।

कटारिया ने कहा कि केंद्र सरकार के कानूनों से न सिर्फ कृषि उपज मंडिया खत्म हो जाएंगी बल्कि इन मंडियों में चलने वाले बैंक भी बंद होंगे।, कटारिया ने बताया कि इन कृषि बिलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का कोई उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए इन बिलों के विरोध में अनेक राज्यों की सरकारें और किसान संगठन आंदोलनरत है।

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने केन्द्रीय कृषि बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह बिल किसान हितैषी होता तो केन्द्र सरकार को पहले देश के किसानों को और फिर अपने राजनीतिक साथियों को विश्वास में लेकर बिल संसद में लाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि इस बिल से साधारण और छोटे किसान काफी चिन्तित है। पंजाब, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों के किसान इस बिल के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं।

आंजना ने कहा यह बिल लाकर भारत सरकार ने फसल को समर्थन मूल्य पर खरीदने पर रोक लगाई है। उन्होंने कहा कि यदि हमें किसानों की आय को दुगना करना है।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी
Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

Advertisement

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
Top