राज्य में पहली से पांचवीं कक्षा के बच्चों को स्थानीय बोली में पढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी) ने सभी 33 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डाइट) से अपने क्षेत्र की बोलियों की जानकारी मांगी है। यही नहीं, प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी जा रही है। बता दें, नई शिक्षा नीति में कक्षा-5 तक मातृभाषा या स्थानीय भाषा को पढ़ाई के

माध्यम के रूप में अपनाने पर फोकस है। तर्क ये कि इससे छोटे बच्चे अपनी भाषा में अवधारणाओं को ज्यादा तेजी से सीखेंगे। लेकिन क्योंकि राजस्थानी भाषा को मान्यता नहीं है और इसकी लिपि भी नहीं है, इसलिए इसे स्कूल शिक्षा में शामिल करना आसान नहीं है। ऐसे में राज्य के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली मेवाड़ी, मारवाड़ी, वागड़ी, हाड़ौती, ढूंढाड़ी, शेखावटी आदि स्थानीय बोलियों के रूप में विकल्प तलाशा जा रहा है।

पहले गुरुजी की ट्रेनिंग, लॉन्च किया ऑनलाइन कोर्स, बनेगी वर्कबुक भी
सभी डाइट से बोलियों की विशेष रिपोर्ट मिलने पर आरएससीईआरटी शब्दकोश तैयार कर कार्ययोजना सरकार को सौंपेगी। पाठ्य सामग्री तैयार करना शुरू हो गया है। स्वयंसेवियों संस्थाओं की मदद से वर्कबुक भी तैयार कर रहे हैं। एक्टिविटी लर्निंग बेस्ड (एबीएल) किट में हिंदी और स्थानीय बोली दोनों का विकल्प है। दूसरी ओर, पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स लॉन्च किया है।

इसमें शिक्षकों को बुनियादी भाषा, गणितीय कौशल, मौखिक भाषा विकास आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यूनिसेफ और एलएलएफ के तकनीकी सहयोग से प्राथमिक कक्षाओं में शिक्षण पर 5 मॉड्यूल्स का एक कोर्स तैयार किया है। इसमें भाषा शिक्षण से जुड़ी अवधारणाओं, मौखिक भाषा विकास, डीकोडिंग के व्यवस्थित शिक्षण आदि में शिक्षकों को मदद मिलेगी। कोर्स के दौरान कंटेंट के अनुसार विभिन्न अवधि के मॉड्यूल्स रहेंगे, जिसमें विषयवार प्रशिक्षण की जानकारी रहेगी।

फयदा: चार साल पहले सिरोही में शुरुआत, 30 से 37% सुधरा गणित-हिंदी का रिजल्ट

20 जनवरी, 2015 को टाटा ट्रस्ट और सरकार के बीच अनुबंध के बाद ‘बुनियाद’ मॉडल शुरू किया। सबसे पहले सिरोही में सत्र 2016-17 से शुरू इस प्रोग्राम की शुरुआत हुई। यहंा 56 सरकारी स्कूलों के 6 हजार 248 छात्रों को गरासिया बोली में पढ़ाया जा रहा है। चार साल में यहां हिंदी में 30 और गणित में 37 फीसदी सुधार हुआ है। इसके लिए पहले शिक्षकों को तैयार किया गया था, ताकि वे उस बोली में पढ़ा सकें। इन विषयों की खास वर्कबुक तैयार करने के साथ एक्सट्रा क्लासें भी लगाई गई।

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Students of 1st to 5th will be taught in local dialects like Mewari-Marwadi, RSCERT remained dictionary
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