ये तस्वीर है कोरोना से जान गंवाने वाले एक शिक्षक के घर की। सोमवार को यहां पूरे गांव के महिला-पुरुष और बच्चे पहुंचे। उन्हें यहां विभिन्न प्रकार के पकवान बनाकर खिलाए गए। यही नहीं, शिक्षक के परिजनों के बुलावे पर पहुंचे सगे संबंधियों को कपड़े आदि उपहार के रूप में दिए गए। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन ने भी यहां भीड़ को जुटने से नहीं रोका।
जानकारी के अनुसार नौसर निवासी शिक्षक की तीन दिन पहले एम्स में उपचार के दौरान कोरोना से मौत हो गई थी। तीसरे दिन परिजनों ने ग्रामीणों को भोज दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। उनमें न तो किसी ने मास्क पहना था और न ही सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखा। एक टैंट के नीचे खचाखच लोग बैठे खाना खाते नजर आए।
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