धोद के कई गांवों में केन्द्र सरकार द्वारा पारित कृषि विधेयकों के विरोध में कांग्रेस सेवादल द्वारा ऊंटगाड़ा सभा का आयोजन किया गया। सभा में कृषि बिल के प्रति किसानों ने आक्रोश व्यक्त किया तथा पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य चुनावों में भाजपा का कड़ा विरोध करने की चेतावनी दी। सभा को कांग्रेस सेवादल जिलाध्यक्ष नरेंद्र बाटड़ सहित अन्य किसानों ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि इस बिल में एमएसपी का उल्लेख नहीं किया गया। इसका मतलब आगे एमएसपी को खत्म करने की साजिश रची गई है। इस बिल में उद्योग कंपनियों के लिए सभी खाद्य पदार्थों को अनलिमिटेड स्टाॅक रखने की खुली छूट दी गई है। इससे बाजार में कालाबाजार व महंगाई उच्च स्तर पर बढ़ेगी।
इस बिल में किसान व कंपनी के बीच विवाद होने पर किसान सिविल न्यायालय नहीं जा सकता। केवल सरकार के प्रशासनिक अधिकारी को फरियाद दे सकता है। इस बिल से किसान मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और फिर ये ही मंडियां रेलवे एयरपोर्ट की तरह उद्योगपतियों को खाद्य स्टॉक के लिए बेच दी जाएगी। इसलिए केन्द्र सरकार द्वारा पारित किसान विधेयक बिल किसानों के लिए काला कानून है।
सेवादल जिलाध्यक्ष बाटड़ ने कहा कि ये कृषि बिल किसानों के फायदे का ना बनाकर केवल उद्योगपति कंपनियों के लिए बनाया गया है। सेवादल द्वारा इस बिल के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए जिले में चलाए जा रहे कार्यक्रमों के तहत शहरों में मुख्य बाजार नुकड़ सभा, गांव चौपाल में खाट व ट्रैक्टर सभा तथा ढाणियों में ऊंटगाड़ा सभा का आयोजन किया गया, जहां किसानों में भारी आक्रोश देखने को मिला और पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य चुनावों में किसान मजदूर व आमजन ने भाजपा को सबक सिखाने का निर्णय लिया है।
इस दौरान ब्लाॅक कांग्रेस अध्यक्ष बुंदू खान राजास, नेछवा ब्लाॅक सेवादल अध्यक्ष नंदूसिंह शेखावत, एडवोकेट सुरेश भास्कर, जीतू भोजासर, राधेश्याम पुरोहित बठोठ, मेघाराम छब्बरवाल, सांवरमल छब्बरवाल, दानाराम बीस्सू, मालाराम बीस्सू, नारायण छब्बरवाल, कन्हैयालाल स्वामी, भगवानाराम बीस्सू, सुगनाराम, गोकुल मीणा, राजेन्द्र सिंह, रामेश्वर जाखड़, जगदीश जाखड़, भंवरलाल बीस्सु, रोहिताश्व सिहाग, प्रहलादसिंह, श्रवण बीस्सू, महेश, छोटी देवी, भंवरी देवी, सन्तोष, मंजू आदि थे।
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