क्या आप जानते हैं कि भरतपुर का सबसे प्राचीन चर्च कौन-सा है। नहीं तो भास्कर में देखिए। करीब 163 साल पहले पॉलिटिकल एजेंट मेजर मोरिसन ने इसे एमएसजे कालेज में बनवाया था। यह जगह कभी पॉलिटिकल एजेंट का आवास और आफिस हुआ करती थी।

यह ककइया ईंटों से गोलाकार थी और इसमें 8-10 लोगों के बैठने की व्यवस्था थी। इसकी छत छप्पर की थी। मध्य में क्रास और वेदी बनी थी। साइडों में बैठने के लिए कुर्सियां भी थीं। इसके चारों और बरामदा था। यह चर्च एमएसजे कालेज की लाइब्रेरी के पीछे और लॉ कालेज के पिछवाड़े में बना है।

अरसे से काम नहीं आने के कारण अब इसकी दीवारें ही बची हैं। राजघराने से जुडे़ काका रघुराजसिंह बताते हैं कि 1845 तक रीजेंसी सेवर में थी। वर्ष 1856 में पॉलिटिकल एजेंट बनकर मेजर मोरिसन आए। उनके लिए एसएसजे कालेज के मध्य में स्थित भवन, जो अब प्राचार्य कक्ष और सभाकक्ष परिसर हैं, में आवास एवं कार्यालय बनवाया गया।

इस परिसर का स्थापत्य ब्रिटिश शैली का है। प्रार्थना के लिए उसी से सटे स्थान पर गोल चर्च का निर्माण हुआ। यह चर्च आजादी से पहले तक कायम रहा। वर्ष 1948 में यह परिसर महारानी श्री जया कालेज में तब्दील हो गया। साथ ही गोपालगढ़ मोहल्ले में नया और बड़ा चर्च बन गया। इसलिए इसकी उपयोगिता समाप्त हो गई।

चर्च का उपयोग नहीं होने से छप्पर टूट गया और सामान को लोग ले गए : आरके शर्मा
एमएसजे कालेज में पढ़े और लेक्चरर रहे प्रो. आरके शर्मा ने बताया कि 1950 के दशक में जब हम लोग पढ़ते थे तब हमने गोल चर्च में क्रास, पंखा, ऊंची कुर्सियां देखी थीं। छत पर छप्पर डला था। लेकिन उपयोग नहीं होने से छप्पर टूट गया और सामान को लोग ले गए। यह चर्च पॉलिटिकल एजेंट बन कर आए इंडियन सिविल सर्विस के अधिकारी मेजर मोरिसन सहित डीसी मैकंजी, आईई हीमन, सीपी हैंक कोक आदि अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए विशेष तौर से था।



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163 years ago, the first Gol Church was built on the MSJ College campus in Bharatpur
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