(डूंगरसिंह राजपुरोहित). राजस्थान में हुए 20 जिला परिषदों के परिणामों में भी दोनों पार्टियों के दिग्गजों का परिवारवाद हावी रहा। बड़े नेता खुद पार्टी का फायदा उठा रहे है, अब अपनी बेटी, पुत्रवधु, पत्नी को भी राजनीति में उतार कर 10 जिलों में परिवारवाद का झंडा गाड़ दिया। इन चुनावों में कांग्रेस-बीजेपी के दिग्गज अपने परिवार को राजनीति में स्थापित करने इतने लालायित दिखे कि कुछ तो पार्टियों से बगावत करने से भी नहीं चूके।

आधा दर्जन जगह तो जोड़ तोड़ भी चली। कुछ अपनी पत्नी या पुत्रवधु को जिला प्रमुख बना के ही माने। इससे साबित होता है कि राजनीति में परिवारवाद पंचायती राज संस्थाओं में भी कितना हावी है। पूर्व मंत्री और एमएलए महेंद्रजीत मालवीय अपनी पत्नी को बांसवाड़ा जिला प्रमुख बनाने में सफल रहे। पूर्व मंत्री प्रेमसिंह बाजौर अपनी पुत्रवधु को सीकर की जिला प्रमुख बनाने में सफल रहे। सांसद नरेंद्र खीचड़ की पुत्र वधु झुंझुनूं की जिला प्रमुख बन गई।

प्रतापगढ़ की जिलाप्रमुख बनी इंद्रा मीणा वर्तमान एमएलए रामलाल मीणा की पत्नी है। नागौर से लाॅटरी से जीते भागीरथ चौधरी खुद खींवसर सीट पर भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड चुके। हार गए तो अब जिला प्रमुख बन गए। चूरू में तो पूर्व एमएलए की पौत्र वधु जिला प्रमुख बनी है। बाड़मेर में तो मंत्री के पुराने सहायक को ही कांग्रेस ने उतार दिया। बीजेपी को तोड़कर मंत्री का नजदीकी सहायक जीत गया। उदयपुर में बीजेपी के जिला देहात अध्यक्ष भंवरसिंह पंवार की बेटी (25) सबसे छोटी उम्र की जिला प्रमुख बनी है। प्रधान के पदों पर तो 100 से अधिक बड़े नेताओं के परिवार जन उतारे गए और करीब 70 जीते हैं।

ये पूर्व विधायक अब जिला प्रमुख चुने गए
चित्तौड़गढ़ के जिला प्रमुख का चुनाव निर्विरोध जीते सुरेश धाकड़ बेगूं से पूर्व एमएलए रह चुके हैं। एमएलए का टिकट दुबारा नहीं मिला तो अब जिला प्रमुख के लिए भाग्य आजमाया। चित्तौड़ में बीजेपी के 25 में से 21 सीटें मिली। इसी तरह 2008 में बीजेपी के टिकट से मसूदा चुनाव लड़े भंवरसिंह पलाड़ा और 2013 में बीजेपी से विधायक चुनी गई उनकी पत्नी सुशीला कंवर पलाड़ा ने इस बार बागी होकर जिला प्रमुख का चुनाव लड़ा। जोड़ तोड़ से जीत गई।

जैसलमेर में पहली बार फकीर के परिवारवाद को बाहर किया
बॉर्डर जिले जैसलमेर में जिला परिषद पर पिछले चार दशक से खांटी नेता गाजी फकीर के परिवार का कब्जा था। पहली बार रूपा राम धनदे और फकीर परिवार आमने सामने होने से कांग्रेस में फूट पड़ी। दोनों ने अपने परिवार के प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया। लेकिन गांजी परिवार से ताल्लुक रखने वाली रुक्कैया को उतार कर कांग्रेस ने दाव खेला और पार्टी बंट गई। इस कारण बोर्ड जिले में आजादी के बाद पहली बार बीजेपी को जीत हासिल हुई।

दो जिलों में पहली बार बने भाजपा के जिला प्रमुख
जैसमलेर और झुंझुनू जिले ऐसे रहे, जिनसे बीजेपी की जिला प्रमुख पहली बार बने। जैसलमेर से बीजेपी के रामगढ़ इलाके से नए चेहरे प्रतापसिंह जीत गए। जैसलमेर में आज तक बीजेपी का जिला प्रमुख नहीं बना था। पहले एमएलए जीते और बाद में सांसद चुनाव जीतने वाले खीचड़ ने अपनी पुत्र वधु को उतार कर झुंझुनूं में भी बीजेपी जिलाप्रमुख का खाता खुलवा दिया।

नागौर : विधानसभा चुनाव की लड़ाई जिला प्रमुख की टक्कर में निकाली
नागौर के जिला प्रमुख बने भाजपा के भागीरथराम चाैधरी 2018 में बीजेपी के टिकट से विधानसभा चुनाव भी लड़े थे। उनके सामने विधानसभा में भी कांग्रेस के सहदेव चाैधरी थे। अब जिला प्रमुख चुनाव में भी दोनों दिग्गज आमने सामने हो गए। दाेनाें काे बराबर वाेट मिले। जिसके बाद लाॅटरी निकाली गइ। जिसमें भागीरथराम ने बाजी मार ली।

बहुत ही रोचक रहा मुकाबला, जिसमें आरएलपी का अलग से प्रत्याशी खड़ा करने से दोनों दलों को जोड़तोड़़ के कारण बराबर वोट मिल गए। लिहाजा सबसे बुजुर्ग जिला प्रमुख के रूप में 73 वर्षीय भागीरथ चौधरी के नाम लाॅटरी खुल गई। भाजपा के यहां 20, कांग्रेस-18 तथा रालोपा के 9 प्रत्याशी सदस्य चुने गए थे। भाजपा के एक सदस्य ने क्राॅस वाेटिंग कारण दोनों के वोट 19-19 हो गए थे।

14 जिला परिषदों व 133 पंचायत समितियों में महिला प्रमुख बनीं

प्रदेश के 20 जिलों में हुए पंचायत राज चुनावों में महिलाओं का दबदबा कायम रहा। प्रदेश की 14 जिला परिषदों में महिला जिला प्रमुख बनी है। वहीं 221 में से 133 पंचायत समितियों में महिला प्रधान बनी है। पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा जिला प्रमुख व प्रधान के पदों पर महिलाओं का कब्जा हुआ है। कई जिलों की ज्यादातर पंचायत समितियों में महिला प्रधान बनी है। महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों से ज्यादा सीटों पर जीत होने से राजनीतिक समीकरण बदलने लगे है।

जिला वार महिला प्रधान

अजमेर में 6, बांसवाड़ा में 5, बाड़मेर में 10, भीलवाड़ा में 8, बीकानेर में 6, बूंदी में 2, चित्तौडगढ में 5, चुरु में 5, डूंगरपुर में 5 महिला प्रधान बनी है। वहीं हनुमानगढ़ में 4, जैसलमेर में 3, जालौर में 8, झालावाड़ में 6, झुझूनू में 7, नागौर में 12, पाली में 8, प्रतापगढ़ में 5, राजसमंद में 4, सीकर में 8, टोंक में 4 व उदयपुर में 12 महिला प्रधान बनी है।

बीजेपी-कांग्रेस दोनों एक-दूसरे के मंसूबाें पर पानी फेरती रही, डूंगरपुर में मिलकर बीटीपी को दे दी मात

जिला प्रमुख व पंचायत समिति प्रधान के लिए गुरुवार काे बीजेपी-कांग्रेस ने जमकर ताेड़फाेड़ की। दाेनाें ही पार्टियाें ने एक-दूसरे के मंसूबाें की कामयाबी राेकने के लिए जिला स्तर पर जमकर लड़ाई लड़ी। जबकि डूंगरपुर में बीजेपी-कांग्रेस ने बीटीपी काे राेकने के लिए हाथ मिलाने से भी परहेज नहीं किया।

बूंदी में कांग्रेस ने बीजेपी काे झटका दिया। वहीं नागाैर में बराबरी का मामला रहने के बावजूद कांग्रेस के हाथ से बाजी निकल गई । बाड़मेर में भी बीजेपी काे नुकसान उठाना पड़ गया। गाैरतलब है कि दाेनाे पार्टियाें ने बाडेबंदी की थी और निर्दलीयाें काे भी इसमें दाखिल कराया था। दाेनाे ही पार्टियाें ने एक दूसरे पर लालच देकर सदस्य ताेड़ने के आराेप भी लगाए है।

कांग्रेस-बीजेपी ने कहां-कैसे एक-दूसरे की पलटी बाजी

  • अजमेर जिला प्रमुख पद के लिए बीजेपी लीड कर रही थी लेकिन कांग्रेस ने बीजेपी के बागी काे सपाेर्ट करके बीजेपी के मंसूबाें पर पानी फेर दिया।
  • जैसलमेर में बहुमत के बावजूद कांग्रेस प्रमुख नहीं बना पाई और 4 वोट क्रोस होने से भाजपा का जिला प्रमुख बन गया। बीजेपी प्रदेशाध्यख सतीश पूनियां ने कहा कि तीन दशक में पहला माैका है जब बीजेपी काे इस जगह पर सफलता मिली है। इससे पहले गाजी फकीर और कांग्रेसियाें का इस क्षेत्र में दबदबा था। पहली बार बाॅर्डर के करीब बीजेपी का कब्जा हुआ है।
  • बूंदी में बहुमत के बावजूद बीजेपी से बागी हुई महिला उम्मीदवार काे मंत्री अशाेक चांदना ने मदद कराई और कांग्रेस की मदद से जिला प्रमुख बनवा दिया। ऐसे में बीजेपी के हाथ से एक जिला प्रमुख की सीट निकल गई। बीजेपी के नेता दिनभर अशाेक चांदना काे बाजी पलटने की वजह से काैसते दिखे।
  • बाड़मेर में कांग्रेस और भाजपा के 18-18 उम्मीदवार जीते थे लेकिन कांग्रेस के महेंद्र चौधरी 21 वोट लेकर चुनाव जीत गए। आरएलपी का बाड़मेर में कांग्रेस नेता के पक्ष में खड़ा रहना चर्चा का विषय भी रहा।
  • नागौर में भाजपा और कांग्रेस के वोट 19-19 बराबर होने के बाद लॉटरी से भाजपा के भागीरथ चौधरी जिला प्रमुख बने। यहां पर आरएलपी ने अपना उम्मीदवार खड़ा किया था जिसको 9 के 9 वोट मिल गए। बीजेपी नेताओं ने आरएलपी का गढ़ माने जाने वाले नागाैर में जीत पर जमकर खुशी भी मनाई।
  • डूंगरपुर में 27 में से बीटीपी के 13 जिला परिषद सदस्य जीते थे यानी बहुमत से एक कम फिर भी भाजपा जिला प्रमुख बनाने में कामयाब हुई। यहां रोचक बात यह हुई की भाजपा के 8 और कांग्रेस के 6 सदस्य चुनाव जीत कर आए थे, लेकिन दोनों ने बीटीपी का प्रमुख नहीं बनने दिया और आपस में ही गठबंधन कर लिया।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
अजमेर : भाजपा की सीमा रावत बनीं प्रधान, जीत का जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता।
Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf

Advertisement

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

 
Top