हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत लोक सेवकोें पर लगाए गए हर्जाने की वसूली के मामले में राज्य सूचना आयोग के रजिस्ट्रार को निर्देश दिए हैं कि वह हर्जाने की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाएं। सीजे इन्द्रजीत महान्ति व जस्टिस एसके शर्मा की खंडपीठ ने यह निर्देश तरुण अग्रवाल की पीआईएल का निपटारा करते हुए दिया।

अधिवक्ता पीसी भंडारी ने बताया कि पीआईएल में कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर दूसरी अपील सूचना आयोग के यहां पर होती है। सूचना आयोग दोषी पाए जाने वाले लोक सूचना अधिकारियों पर 25 हजार रुपए तक का जुर्माना लगा सकता है। लेकिन आरटीआई से मिली सूचना से पता चला कि आयोग ने करीब दस सालों में दोषी लोक सूचना अफसरों पर जो हर्जाना लगाया उसमें से करीब ढाई करोड़ रुपए की वसूली नहीं हो पाई है।

ऐसे में हर्जाने की वसूली नहीं होने के चलते लोक सूचना अफसर सूचनाएं देने में मनमानी कर रहे हैं और सूचनाएं नहीं दे रहे हैं। जबकि इस संबंध में सीएस व आयोग को भी प्रतिवेदन दे दिया, लेकिन फिर भी हर्जाना राशि की वसूली नहीं हो पा रही। इसलिए दोषी अफसरों से हर्जाने की वसूली करवाई जाए। अदालत ने याचिका को निस्तारित करते हुए आयोग के रजिस्ट्रार को हर्जाने की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया।



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