काेराेना के दाे साइड इफैक्ट सामने आए है। पहला ब्लड बैंकाें में ब्लड की कमी। दूसरी समस्या जिला अस्पताल मेें ऑपरेशन भी नहीं हाे रहे। इसके चलते मरीजाें काे प्राइवेट अस्पतालाें की शरण लेनी पड़ रही है। माेटी रकम खर्च कर ऑपरेशन कराना मरीजाें की मजबूरी बन गई है। हालांकि ब्लड बैंक में रक्त की कमी ताे रक्तवीराें से दूर की जा सकती है। ब्लड बैंक से जुडे़ कार्मिक रक्तदान करने वाली संस्थाओं एवं रक्तवीराें से लगातार संपर्क में है। दूसरी और अस्पताल प्रशासन के हिसाब से अभी ऑपरेशन कराने वालाें काे और इंतजार करना हाेगा। कारण संक्रमण का खतरा है। हालांकि इमरजेंसी आने वाले चंद मरीजाें के ही ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जबकि प्लांड ऑपरेशन चित्ताैड़ ही नहीं पूरे संभाग के सरकारी अस्पतालाें में बंद है।

प्रतिदिन औसतन 35 यूनिट की खपत, अभी केवल 151 यूनिट हैं, ए और बी ग्रुप पांच-पांच यूनिट ही

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में हर दिन औसतन 35 यूनिट की खपत हाेती है। ब्लड बैंक में ए और एबी ग्रुप केवल पांच-पांच यूनिट ही है। अन्य ब्लड ग्रुप की भी कमी चल रही है। ब्लड बैंक में 1200 यूनिट की क्षमता है। इस वक्त 151 यूनिट ही उपलब्ध है। यह तीन दिन आवश्यकता ही पूर्ति कर सकता है।

जबकि बाकी सालों का रिकार्ड रहा है कि सर्दी के सीजन में ब्लड बैंक में 400 से 500 यूनिट रक्त उपलब्ध रहता है। इस समय सबसे ज्यादा जरूरत गर्भवतियों को पड़ रही है। ब्लड बैंक प्रभारी डाॅ. अनिल सैनी ने बताया कि सर्दी के दिनाें में ब्लड का संकट कम रहता है, लेकिन लंबे समय से बड़ा कैंप नहीं लगा है। साथ चुनाव व शादी-समाराेह में भी लाेग व्यस्त रहे। अभी कमी चल रही है इसलिए कई बार सामाजिक संगठनाें की मदद से डाेनर बुलाकर भी मदद लेते हैं। वर्तमान में ब्लड बैंक में ओ ग्रुप के 65 यूनिट, बी के 30, डी के सात एवं एबी ग्रुप के आठ यूनिट ही है।

परेशानी : गर्भवती, हादसों के गंभीर घायलों और थैलीसिमिया पीड़ित बच्चों को सबसे ज्यादा जरूरत
लाॅकडाउन खुलते ही हादसे भी बढ़ गए, जिसमें में घायलाें काे रक्त की जरूरत पड़ने लगी। इमरजेंसी में भर्ती होने वाले गंभीर मरीज, सड़क हादसों में गंभीर घायल और जटिल ऑपरेशन के मरीज भी शामिल हैं। गंभीर एनीमिया ग्रसित गर्भवतियों और आठ से कम उम्र की हीमोग्लोबिन वाली छात्राएं। थैलेसिमिया रोगियों को नियमित अंतराल में खून की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

जहां औसतन प्रति माह 50 सर्जरी, अब उदयपुर-भीलवाड़ा जाना पड़ रहा

काेराेना का खतरा बढ़ते ही मार्च में जिला अस्पताल प्रशासन ने सामान्य, ईएनटी, आर्थाेपेडिक सर्जरी पर राेक लगा दी थीं। इससे पहले सामान्य रूप से आंखाें के औसतन प्रति महीने 100 एवं अन्य कैटेगिरी के करीब 50 ऑपरेशन हाेते थे। लेकिन काेराेना संक्रमण के चलते प्लांड ऑपरेशन बंद कर दिए गए। अभी वर्तमान में केवल इमरजेंसी ऑपरेशन ही किए जा रहे है। अस्पताल प्रशासन की मजबूरी है कि काेराेना संक्रमण के चलते अभी सामान्य ऑपरेशन शुरू नहीं कर सकते। इसके चलते वर्तमान में आंखाें एवं अन्य ऑपरेशन के मरीजाें काे भीलवाड़ा एवं उदयपुर निजी अस्पतालाें में जाना पड़ रहा है। इससे आर्थिक एवं समय दाेनाें की बर्बादी मरीजाें काे झेलनी पड़ रही है।

सलाह : डरें नहीं, रक्तदान के दाैरान काेराेना गाइडलाइन की पूरी पालना, घाेसुंडा में शिविर लगाया... श्री सांवलियाजी अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डाॅ. अनिल सैनी ने बताया कि रक्तदान करने वालाें के लिए काेराेना गाइन का पालन किया जा रहा है। परिसर काे दिन में तीन बार सेनेटाइज किया जाता है।

साथ ही रक्तदान करने से पहले व रक्तदान करने के बाद बेड काे सेनेटाइज किया जाता है। रक्त संग्रहित करने वाले कर्मचारी हर वक्त मास्क लगाएं रखते हैं। साथ ही काेराेना वार्ड और ओपीडी से ब्लड बैंक दूर है। इस लिए काेराेना से डरे बिना यहां पर रक्तदान किया जा सकता है। उन्हाेंने बताया कि घाेसुंडा में एक रक्तदान शिविर लगा। इसमें 41 यूनिट रक्त ब्लड बैंक काे प्राप्त हुआ है।



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Blood bank of district hospital has only four days of blood, operation stopped for 9 months
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