(ओमप्रकाश शर्मा). शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम ने कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों से डोर टु डोर कचरा उठाने पर सफाई शुल्क लेने की तैयारी कर ली है। सभी काॅमर्शियल प्रतिष्ठानों से निगम कचरा उठाने पर उनसे इंदौर की तर्ज पर मासिक शुल्क वसूल करेगी। अभी मासिक राशि तय नहीं की गई है। इंदौर में प्रत्येक कॉमर्शियल प्रतिष्ठान और घरों से 100 रुपए कचरा संग्रहण करने पर शुल्क वसूल किया जाता है। अभी तक जयपुर में यह व्यवस्था लागू नहीं है।
पायलेट प्रोजेक्ट के तहत निगम द्वारा पहले उन प्रतिष्ठानों से ही वसूल किया जाएगा, जहां पर निगम द्वारा खुद के स्तर पर कचरा संग्रहण करेगी। नगर निगम के अधिकारियों ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। ग्रेटर नगर निगम व हैरिटेज नगर निगम में करीब पांच हजार कॉमर्शियल प्रतिष्ठान है। जहां से प्रतिदिन करीब 200 टन कचरे का बीवीजी कंपनी द्वारा कचरे का संग्रहण किया जाता है। कचरा संग्रहण शुल्क वसूलने से नगर निगम की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो जाएगी। क्योंकि बजट नहीं होने से इनदिनों नगर निगम की आर्थिक स्थिति खराब है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे है।
नगर निगम ने बीवीजी कंपनी को शहर में डाेर टु डोर कचरा संग्रहण करने की जिम्मेदारी दे रखी है। जबकि सर्वेक्षण में पिछले चार साल से पहली रैंक लेने वाले इंदौर शहर के निगम के अधिकारी खुद अपने स्तर पर कचरे का संग्रहण करते है। जयपुर शहर में करीब पांच लाख घरों से कचरा उठाने की बीवीजी कंपनी को जिम्मेदारी दे रखी है। ऐसे में सभी घरों और कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों से शुल्क वसूल किया जाएगा तो नगर निगम को काफी फायदा होगा।
वसूली के आरोप नहीं लगेंगे : हूपरकर्मियों पर अकसर दुकानों से वसूली करने के आरोप लगते हैं। शिकायतें मिलती हैं कि हर महीने पैसे नहीं देने पर हूपरकर्मी कचरा नहीं उठाते। नगर निगम नेे कचरा संग्रहण शुल्क लेना शुरू किया तो निगमकर्मियों व हूपरकर्मियों पर वसूली के आरोप भी नहीं लगेंगे।
शुल्क वसूलने पर मंथन चल रहा है
^कचरा संग्रहण शुल्क सर्वेक्षण की गाइडलाइन में है। इस पर मंथन चल रहा है। कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों से शुल्क वसूल करने की योजना बना रहे है।
- हर्षित वर्मा, उपायुक्त हेल्थ एवं नोडल अधिकारी स्वच्छता सर्वेक्षण, नगर निगम
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