सद्गुरु माता सुदीक्षा ने कहा कि जीवन में स्थिरता, सहजता और सरलता के लिए परमात्मा के साथ नाता जोड़ें। वे बुधवार को तीन दिवसीय 73वें वर्चुअल वार्षिक निरंकारी संत समागम के समापन समारोह में साधकों का मार्गदर्शन कर रहीं थीं। माता सुदीक्षा ने कहा कि परमात्मा शाश्वत सत्य है। जब हम अपना मन उनके साथ जोड़ देते हैं तो जीवन सफल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि जैसे एक वृक्ष में फल लगने से पहले फूल आते हैं और फल उतारने का समय भी आ जाता है। उसके पश्चात पतझड़ का मौसम आता है। इससे पत्ते निकल जाते हैं। एक हरा-भरा वृक्ष ठूंठ हो जाता है। अस्थिरता और मौसम में परिवर्तन के बावजूद वह वृक्ष अपने स्थान पर खड़ा रहता है, क्योंकि वह अपनी जड़ों के साथ मज़बूती से जुड़ा हुआ होता है।

माता सुदीक्षा ने कहा कि कोरोना के कारण विपरीत परिस्थितियों में बहुत से लोगों की जीवनशैली भी बदल गई। सेवादारों का जज्बा फिर भी कायम रहा। उन्होंने कहा कि सागर का स्वरूप इतना गहरा, बड़ा और विशाल होता है। उसके बावजूद भी उसकी गहराई में कोई हलचल महसूस नहीं होती। उसी तरह जो मानव सहनशील होता है, वह प्रभु के साथ जुड़कर स्थिर रहता है।



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