नगरपरिषद आयुक्त प्रियंका बुडानिया काे डीएलबी ने एपीओ कर दिया है। कलेक्टर महावीर प्रसाद वर्मा ने मंगलवार काे एक आदेश जारी करते हुए एसडीएम उम्मेद सिंह रतनू काे अपने पद के साथ-साथ आयुक्त नगरपरिषद के पद का काम करने के निर्देश दिए। आदेश पत्र में उन्हाेंने स्वायत शासन विभाग जयपुर के निर्देश का हवाला देते हुए लिखा है कि आयुक्त प्रियंका बुडानिया पर भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूराे में एफआईआर दर्ज हाेने के कारण अग्रिम आदेशाें की प्रतीक्षा में मुख्यालय निदेशालय स्थानीय निकाय विभाग जयपुर किया गया है।
कलेक्टर की ओर से जारी आदेश व डीएलबी के पत्र पर आयुक्त ने अनभिज्ञता जताई है। आयुक्त बुडानिया का कहना है कि उन्हें अभी इस संबंध में काेई आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। राेचक यह रहा कि सुबह आयुक्त के नगरपरिषद में आने पर पार्षद अशाेक मुंजराल व अमरजीत गिल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। वहीं, शाम काे एपीओ के आदेश हाे गए।
एसीबी कार्रवाई के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि आयुक्त के पुन: कार्यभार ग्रहण करने के दाैरान कार्रवाई हाेगी और हुआ भी ऐसा ही। दाेपहर तक आयुक्त की खुलेआम खिलाफत करने वाले पार्षद जहां मायूस थे, वहीं शाम काे एपीओ के आदेश की जानकारी मिलते ही उन्हाेंने खुशी व्यक्त की। पूर्व पार्षद पवन गाैड़ ने बताया कि आयुक्त के खिलाफ हर स्तर पर शिकायतें की गईं। अधिकारियाें काे दस्तावेज भी दिए गए।
आयुक्त के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई कार्रवाई
आयुक्त प्रियंका बुडानिया के खिलाफ एसीबी मुख्यालय ने मुकदमा दर्ज किया है। जांच अधिकारी भी नियुक्त किया जा चुका है। उनके पास पांच दिसंबर की रात काे सीकर पुलिस ने लक्ष्मणगढ़ में जयपुर जाते 1 लाख 40 हजार नकदी और 10.16 लाख रुपए मूल्य के तनिष्क के गहने बरामद किए थे। इस संबंध में सीकर एसीबी के डीवाइएसपी जाकिर अख्तर ने प्रारंभिक जांच पूरी कर आयुक्त बुडानिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने काे रिपाेर्ट जयपुर एसीबी मुख्यालय भेजी थी। इस रिपाेर्ट के परीक्षण के बाद डीजीपी एसीबी बीएल साेनी ने आयुक्त बुडानिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए। लिहाजा बुडानिया पर एक दिन में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। श्रीगंगानगर चाैकी से डीवाइएसपी वेदप्रकाश लखाेटिया ने गाेपनीय रिपाेर्ट सीकर भिजवा दी थी।
2 अगस्त 2019 काे ज्वाइनिंग, 5 जनवरी 2021 काे एपीओ
आयुक्त प्रियंका बुडानिया का कार्यकाल करीब डेढ़ साल रहा। उन्हाेंने 2 अगस्त 2019 काे आयुक्त पद पर कार्यभार संभाला। इसके बाद से वे विवादाें में ही रहीं। आयुक्त बुडानिया की पार्षदाें के साथ नहीं बनी। पार्षदाें द्वारा उन पर खुलकर आराेप लगाए गए। यहां तक कि पूर्व पार्षद पवन गाैड़ ने एसीबी में परिवाद भी दर्ज करवाया।
आयुक्त पर माेबाइल फाेन काॅल नहीं रिसीव करने, कार्यालय में एंट्री पर राेक लगाने, वाॅयस वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने, मनमर्जी से निर्माण कार्य करवाने व नगरपरिषद की बजाय सभापति करूणा चांडक के निजी कार्यालय में बैठकर कामकाज निपटाने के आराेप लगते रहे हैं। 5 जनवरी 2021 काे आयुक्त के एपीओ हाे जाने के बाद आयुक्त के विराेधी पार्षदाें ने राहत की सांस ली है। पार्षद कमल नारंग, प्रियंक भाटी, विजेंद्र स्वामी सहित अन्य का कहना है कि एसीबी में मुकदमा दर्ज हुआ है, जांच में हकीकत सामने आ जाएगी। आयुक्त पर कार्रवाई जरूर हाेगी।
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