रहस्यमयी बीमारी से कौओं की मौत का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। वहीं चार दिन पूर्व पशुपालन विभाग द्वारा मृत सात कौओं के विसरा की भोपाल लैब भेजी रिपोर्ट नेगेटिव आई। केरू गांव में दो दिन पूर्व करीब बीस कौओं की मौत होने की जानकारी सामने आई।
पक्षी प्रेमी सुमित माहेश्वरी ने ग्रामीणों के सहयोग से पीपीई किट पहनकर शवों को दफना दिया। इधर भोपाल लैब भेजी गई रिपोर्ट में मृत कौओं की पुष्टि बर्ड फ्लू से नहीं होना बताया गया है। शहर में कौओं की मौत के मामले की जांच करने औैर कोई पक्षी बीमारी से ना मरे, इसलिए संभागीय आयुक्त डॉ. राजेश शर्मा ने विभिन्न महकमों के अधिकारियों की बैठक ली।
इस दौरान उन्होंने पशुपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉॅ. चक्रधारी गौतम को एक्शन प्लान बनाकर उसे 7 जनवरी तक पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही इस संबंध में एडवाइजरी तैयार करने के भी निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त निदेशक पशुपालन डॉ. गौतम, संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डाॅ. जोगेश्वर प्रसाद, संयुक्त निदेशक लक्ष्मीनारायण बैरवा, जयपुर के संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डाॅॅ. जितेंद्र कालरा, उपनिदेशक दलवीरसिंह ढड्ढा, डीएफओ वन हनुमानाराम, डीएफओ वन्यजीव महेश चौधरी, मेडिकल कॉलेज से डाॅ. सुमन भंसाली, डाॅॅ. आरएस परिहार, डाॅ. विठलेश व्यास, एसीएफ कृष्णकुमार व्यास, डीसीएफ विकास अरोड़ा आदि उपस्थित थे।
दस-दस पीपीटी किट उपलब्ध कराने के निर्देश
संभागीय आयुक्त ने बैठक में संयुक्त निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. जोगेश्वर प्रसाद गर्ग को संभाग के प्रत्येक जिले में पशुपालन विभाग को पीपीटी किट तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि मृत पक्षी को उठाने, जलाने के कार्य में पीपीटी किट पहनने व एन-95 मास्क और ग्लव्ज पहनकर कार्य करने की आवश्यकता रहती है। साथ ही निर्देश दिए कि सैंपल लैब में ही करवाए जाएं और खुले में पक्षी का पोस्टमार्टम नहीं किया जाए।
पाली व जैसलमेर से भोपाल लैब भेजे सैंपल
अतिरिक्त निदेशक पशुपालन डॉ. गौतम ने बताया कि जोधपुर से मृत कौओं के 7 सैंपल भोपाल भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। पाली से रविवार को 17 मृत पक्षियों के सैंपल भोपाल भेजे हैं, वहीं शनिवार को जैसलमेर से 10 मृत पक्षियों में से 5 के सैंपल भोपाल भेजे गए हैं। इनकी रिपोर्ट आनी है। वहीं जालोर, सिरोही व बाड़मेर में अभी कोई केस सामने नहीं आया है। इसके अलावा मॉनिटरिंग के लिए तहसील स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं।
बैठक में ये निर्णय हुए
पशुपालन व वन विभाग समन्वय बनाकर काम करें।
पशुपालन विभाग बर्ड्स सैंपल रिपोर्ट व अन्य जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को प्रतिदिन दे।
झुंड में बैठे पक्षियों और वाटर बॉडी पर नजर रखें।
मृत कौओं के अलावा कबूतरों पर भी नजर रखें।
मोरों के मरने की बात सामने आ रही है, इसलिए इस मामले में भी सतर्कता बरतें।
पक्षियों के मरने की सूचना मिलने पर उनको उठाने और सैंपल लेने की कार्रवाई करें।
जाेधपुर सहित संभाग के सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित करें, जिसमें दिनभर कर्मचारी तैनात रहें।
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