(शैलेंद्र माथुर/अंकित सिंह चंद्रावत)प्रदेश में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले कोटा थर्मल की 4 इकाइयां 18 दिन से बंद पड़ी हैं। 4 जून को थर्मल की सभी 7 इकाइयां बंद कर दी गई थीं। ऐसा थर्मल के इतिहास में दूसरी बार हुआ। इससे पहले 2018 में भी सातों इकाइयों को एक साथ बंद किया गया था। इसके पीछे अधिकारियों का तर्क है कि डिमांड में कमी की वजह से उत्पादन बंद करना पड़ा। हालांकि अब 3 यूनिट में दोबारा बिजली उत्पादन शुरू हो गया है।
भास्कर ने इसके पीछे के कारणों की पड़ताल की तो पता चला कि थर्मल से अब बिजली उत्पादन महंगा पड़ रहा है। इसकी बजाए निजी क्षेत्र से बिजली सस्ती पड़ रही है। इसी वजह से सरकार के निर्देश पर बार-बार थर्मल की इकाइयां बंद की जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार थर्मल की कई इकाइयों की तकनीक पुरानी पड़ चुकी हैं। इस वजह से बिजली उत्पादन महंगा पड़ता है।
यहां एक यूनिट बिजली उत्पादन की लागत लगभग 3.40 रुपए आती है, जबकि छबड़ा में ये लागत 2.40 और कवाई के प्लांट में 2.20 रुपए आती है। सरकार का नियम है कि जहां से सस्ती बिजली मिले वहीं से खरीदनी होगी। इसके चलते कोटा थर्मल की यूनिटों को ठप करना पड़ता है।
25 साल पुराने थर्मल प्लांट से अब बिजली उत्पादन महंगा पड़ रहा है। इसलिए भविष्य में कम से कम 4 इकायां पूरी तरह बंद करनी पड़ेंगी। हालांकि कर्मचारियों का कहना है कि सरकार पूरी तरह से थर्मल को बंद करना चाहती है। लेकिन थर्मल के सूत्रों का कहना है कि पुरानी पड़ चुकी 4 इकाइयों को ही बंद किया जाएगा।
इनके नवीनीकरण की योजना पर भी विचार किया गया, लेकिन ये इतना महंगा पड़ रहा था कि इतने में नया प्लांट बनाया जा सकता है।
नवीनीकरण में जितनी लागत आएगी, उतने में नया प्लांट बन जाएगा:रिबाबू गुप्ता, थर्मल के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर
25 साल से आधिक पुराने हो चुका कोटा थर्मल पुरानी तकनीक पर आधारित है, जबकि अब जाे पावर प्लांट बन रहे हैं वाे नई तकनीक के हैं। काेटा थर्मल में बिजली का उत्पादन सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट के मुकाबले मंहगा पड़ रहा है। दरें बदलती रहती हैं, लेकिन वर्तमान में काेटा थर्मल की लागत प्रति यूनिट 3.40 रुपए आ रही है, जबकि छबड़ा थर्मल में 2.40 रुपए और कवाई में 2.20 रुपए प्रति यूनिट लागत आ रही है।
नियम यही है कि जहां से सस्ती बिजली मिले, पहले वहां से लाे, कम पड़े ताे फिर महंगी पर जाओ। जब विंड अच्छी चलती है ताे पनबिजलीघर से सस्ती बिजली मिलती है। यही स्थिति साेलर की भी है। वर्तमान हालात काे देखें ताे काेटा थर्मल की 1, 2, 3 व 4 नंबर की यूनिट काफी पुरानी हाे चुकी हैं और आने वाले समय में इन्हें एक-एक करके बंद करना ही पड़ेगा। सरकार भी कह चुकी है कि 25 साल पुरानी यूनिटों काे बंद किया जाए।
अभी सरकार से एक्टेंशन ले रखा है, लेकिन बढ़ती लागत काे देखते हुए इन्हें लंबे समय तक चलाना संभव नहीं हाेगा। इससे थर्मल बंद हाे जाएगा, ऐसा नहीं है। यहां की 5,6 व 7 नंबर की यूनिट चलती रहेगी। बीच में पुरानी यूनिटाें काे आधुनिक तकनीक पर शिफ्ट करने का भी प्लान बनाया था, लेकिन वाे ऐसा ही था कि पुरानी फिएट या अंबेसेडर कार काे नई बीएस-6 तकनीक की कार में माेडिफाइड करना हाे, इसकी लागत इतनी ज्यादा आ रही थी कि इतने में नया प्लांट लग सकता था। दूसरी इसके लिए एनवायरमेंट क्लीरियेंस भी नहीं मिलती। इसलिए उसे वहीं पर ड्राॅप करना पड़ा।
4 पाॅइंट्स में जाने थर्मल का महत्व
- 2012 में जब उत्तरी ग्रिड फेल हुआ तब अकेले कोटा थर्मल ने पूरे राजस्थान को रोशन रखा था
- 14 साल लगातार थर्मल काे बिजली उत्पादन का नेशनल अवार्ड मिल चुका है।
- राजस्थान की कुल जरूरत का 30 प्रतिशत बिजली उत्पादन कर सकता है काेटा
- राजस्थान का पहला थर्मल प्लांट है कोटा में, इसके अलावा प्रदेश में 3 थर्मल प्लांट हैं
साेलर एनर्जी पर शिफ्ट हाेगा काेटा थर्मल
थर्मल के चीफ इंजीनियर एके सक्सेना के अनुसार थर्मल की पुरानी इकाइयां अभी ताे सरकार से एक्सटेंशन लेकर चला रहे हैं। अब समय सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट का ही है। ऐसे में हमने काेटा थर्मल के लिए रिवाइज प्लान बनाया है, इसे साेलर पावर पर शिफ्ट किया जाएगा। इस प्लान काे इसी वर्ष के बजट में मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने भी स्वीकृति दे दी है।
इसमें थर्मल परिसर में एश डाइट की खाली पड़ी 400 हेक्टेयर जमीन पर 800 मेगावाट का साेलर पावर प्लांट लगाया जाएगा। साथ ही ग्रीन एनर्जी सिटी प्राेजेक्ट में काेटा काे शामिल कर 300 मेगावाट का रूफ टाॅप साेलर प्लांट स्थापित किया जा सकता है। इससे काेटा थर्मल द्वारा किए जा रहे बिजली उत्पादन की टाेटल उत्पादन लागत कम हाे जाएगी और नए पावर प्लांट से मुकाबला कर सकेंगे। इन पुरानी इकाइयाें काे अन्य तकनीक पर शिफ्ट करने में ज्यादा लागत एक बड़ा कारण है। इसके साथ सिटी के बीच में आने के कारण इसकी परमिशन भी नहीं मिल रही है।
1240 मेगावाट राेज प्रोडक्शन
काेटा थर्मल की साताें इकाइयाें से प्रतिदिन 1240 मेगावाट बिजली यानि 52.65 लाख यूनिट प्रतिदिन का उत्पादन हाेता है। पहली अाैर दूसरी इकाइयां 110-110 मेगावाट, तीसरी, चाैथी व पांचवीं इकाइयां 210-210 मेगावाट, छठी व सातवीं इकाइयां 195-195 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही हैं। जिससे पूरे उत्तरी ग्रिड को बिजली दी जाती है। उत्तरी ग्रिड से पूरे राजस्थान, उत्तरप्रदेश व पंजाब के पावर प्लांट सहित ग्रिड को बिजली सप्लाई की जाती है।
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