(संदीप शर्मा) पहले तो कोविड पेशेंट को भर्ती नहीं करने में आनाकानी और अब सरकार की ओर से निर्धारित कीमतों पर नाराजगी। मामला जुड़ा है निजी अस्पतालों में कोविड पेशेंट को भर्ती करने और सरकार की अोर से वार्ड और आईसीयू बेड की कीमतें निर्धारित करने से।
सरकार की ओर से कीमतें तय करने के बाद निजी अस्पताल संचालकों ने कहा है कि कीमतें तय करने से पहले उनसे कोई राय नहीं ली गई है। ये बहत ही कम कीमत है और कोविड पेशेंट को भर्ती करने के बाद उसका इतनी कम कीमत में इलाज कर पाना मुश्किल है।
निजी अस्पतालों के इस बयान के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या निजी अस्पताल कोविड पेशेंट भर्ती करेंगे या नहीं। और यदि दबाव में भर्ती भी करते हैं तो कोई ना कोई बहाना बनाकर सरकारी अस्पतालों में रेफर कर सकते हैं। ऐसे में यदि काेई मरीज निजी अस्पताल में जाता है ताे उसका परेशान होना तय है। अब देखना यह है कि सरकार मामले में मरीजों को किस तरह राहत देती है।
सवाल; कितना बिल वसूली मॉनिटरिंग कैसे होगी? शिकायत कहां करें- हैल्पलाइन ही नहीं
सरकार ने एक बार फिर से निजी अस्पतालों के भारी भरकम बिलोंं की शिकायतों के मद्देनजर कोरोना संक्रमण के इलाज की कीमतें तय की हैं। कोई अस्पताल इलाज के लिए मना करता है तो उसकी शिकायत कहां की जाए? साथ ही ऐसे मामले में मॉनिटरिंग का भी जिम्मा किसी को नहीं सौंपा गया है। जरूरी है कि सरकार हेल्पलाइन नंबर जारी करे जहां लोग अपनी परेशानी बता सकें।
- पहले निजी अस्पतालों में जांच की कीमत 4500 रुपए तय की गई थी।
- भास्कर ने मामला उठाया तो कीमत 2200 रुपए की गई।
- अस्पताल ज्यादा वसूलते रहे तो 2000 रुपए तय किए।
- निजी अस्पतालों को आदेश दिए कि वार्ड के 2000 रुपए और आईसीयू के 4000 रुपए ही लिए जाएं।
- इस तय कीमत में आईसीयू भी वेंटीलेटर के साथ उपलब्ध कराना होगा।
- सरकार द्वारा इलाज की कीमत तय करने के बाद भी अस्पतालों में भर्ती करने के बहुत ज्यादा बिल बनाए गए। सरकार ने दोबारा कीमत तय की है। बेड चार्जेज, कंसल्टेशन चार्जेज, इंवेस्टीगेशन (सीबीसी, यूरिन, सीरम क्रिटेनिन, चेस्ट एक्सरे, आईवी केनुला, यूरिनरी ट्रेक्ट केथेरराइजेशन आदि) शामिल रहेंगे।
कोरोना मरीज का इलाज होगा
राज्य सरकार ने सभी निजी अस्पतालों को कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच और इसके पॉजिटिव मरीजों को भर्ती करने की कीमत सम्बन्धी आदेश जारी किए हैं। निजी अस्पतालों को इन्हीं कीमतों में कोविड पेशेंट का इलाज करना होगा। यदि अस्पतालों ने मना किया है तो गंभीर है।
- रोहित सिंह, एसीएस, मेडिकल
कम कीमत में इलाज मुश्किल है
यदि एक मरीज भर्ती होता है तो उसके लिए 12 तो पीपीई किट चाहिए। इसके अलावा भी अन्य खर्चे होते हैं। ऐसे में इतनी कम कीमत में इलाज किया जाना मुश्किल है। मामले में सरकार को फैसला लेने से पहले वार्ता करनी चाहिए थी।
- डॉ. एनएम थरेजा, अध्यक्ष, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन,राजस्थान ब्रांच
निजी अस्पतालों के संगठन ने कहा- कीमत पर फिर से विचार करे सरकार
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, राजस्थान ने कहा है कि सरकार की ओर से जो अधिकतम राशि तय की गई है, उस कीमत में कोविड पेशेंट का सही व सुरक्षित तरीके से इलाज किया जाना संभव नहीं है।
एसेसिएशन पदाधिकारियों ने कहा है कि प्रदेश के अधिकांश अस्पताल संचालक इन दरों से असहमत हैं और मामले में निर्णय लेने से पहले निजी अस्पतालों से कोई राय-चर्चा नहीं की गई। ऐसे में सरकार को इन कीमतों के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।
मरीज के साथ क्या होगा? संदिग्ध भर्ती नहीं करेंगे, गंभीर रैफर करेंगे
भले ही सरकार ने कीमतें तय कर दी लेकिन अब निजी अस्पताल मामले में मनमानी करेंगे। यदि उन्हें कोई भी कोरोना संदिग्ध लगेगा ताे वे उसे भेजने की ही कोशिश करेंगे। क्योंकि किसी भी अस्पताल में भर्ती करने से पहले ही कोरोना के संभावित लक्षण देखे जाते हैं। वहीं यदि कोई भी थोड़ा गंभीर मरीज आएगा तो उसे यह बोलकर रेफर किया जाएगा कि इसका इलाज उनके अस्पताल में संभव नहीं है।
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