खान विभाग ने 4 जून को आरसीसी रॉयल्टी को लेकर वर्ष 2020-2022 तक का ठेका प्रतिवर्ष की राशि 68 करोड़ 81 लाख 32 हजार रुपए में दिया है। वर्ष 2018-2020 तक का गत ठेका 69 करोड़ 40 लाख रुपए में दिया था। यानी इस वर्ष 60-70 लाख रुपए का नुकसान उठाकर यह ठेका दिया है।

इस वजह से खान विभाग की कार्रवाई पर संदेह उठाया जा रहा है। बीड में ठेके की शुरुआती बोली 68 करोड़ 73 लाख रखी गई थी जो 68 करोड़ 81 लाख 32 हजार में ही छूट गई। ठेका गत वर्ष की तुलना में 60-70 लाख से कम है।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब नया ठेका दिया तो राशि ज्यादा होने की बजाय कम क्यों हो गई? सबसे अहम दो माह तक यह ठेका खान विभाग के कर्मचारियों ने संभाला तो प्रतिदिन औसत 22 से 24 लाख रुपए का कलेक्शन हो रहा था। इसे साल के 365 दिन में से बारिश और अन्य कारण मिलाकर केवल 300 दिन से ही गणना करें तो भी यह 72 करोड़ रुपए होते हैं जो वर्तमान ठेका दर से अधिक हैं।
ठेके का गणित

  • पिछले साल ठेका 69 करोड़ 40 लाख में दिया
  • इस बार का ठेका 68 करोड़ 81 लाख 32 हजार में दिया
  • यानी 60-70 लाख का नुकसान
  • विभाग के कर्मचारी वसूलें तो सालाना आय 72 करोड़ होती है
  • यानी 3 करोड़ का हुआ नुकसान

औसत निकाल कर ठेका दिया है, राशि उचित है

  • यह सही है कि हम जो रॉयल्टी वसूली कर रहे हैं, उसकी साल भर से गुणा करें तो अधिक राशि आती है। पर यह सीजन की रेट है। बारिश से पहले अधिक रॉयल्टी मिलती है। इसलिए पूरा ठेका वर्षभर की गणना करके निकाला जाता है, इसलिए यह दर आई है। अभी 68 करोड़ 81 लाख 32 हजार में ठेका दिया है। पूर्व में ठेका दर 77 करोड़ रखी थी, लेकिन कोई नहीं आया। इसलिए 10 प्रतिशत कम कर नया ठेका दिया। -श्रीकृष्ण शर्मा, माइनिग इंजीनियर


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