महापौर और आयुक्त के बीच अधिकारों को लेकर विवाद के चलते पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आरके दास गुप्ता ने हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री और स्वायत शासन मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि आयुक्त के मार्फत मेयर को नोटिस देना उनके पद की गरिमा के विपरित है।
पूर्व विधायक गुप्ता ने खेद व्यक्त करते हुए लिखा है कि पांच माह में निगम की नौकरशाही एवं मेयर के बीच अधिकारों और शक्तियों को लेकर इस हद तक विवाद उभर कर सामने आया है कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में मेयर के पद की गरीमा व प्रतिष्ठा को आघात लगाने की भरपूर कोशिश की जा रही है।

निर्वाचित जनप्रतिनिधि की हैसियत को नकारा जा रहा है। साधारण सभा में कमेटियों के प्रस्ताव का मामला हो या नंदी गोशाला का। दोनों ही गंभीर विवाद का विषय बने हुए हैं। निगम में माहाैल अशांत है एवं अनुशासनहीनता की हदें पा कर रहा है। डीएलबी निदेशक ने धारा 39 के अधीन मेयर को आयुक्त के मार्फत नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है।

इस एक पक्षीय कार्रवाई ने राजनैतिक वातावरण में आग में घी डालने का काम किया है। निगम में मेयर सर्वोच्च वैधानिक पदधारक है। इसलिए यह पत्र सीधे मेयर को ही भेजना चाहिए था। गुप्ता ने अपने पत्र में पालिका एक्ट की धारा 48(ग) के तहत मेयर के कर्तव्य और अधिकारों का उल्लेख भी किया है।

उन्होंने मेयर के अधिकारों और शक्तियों को स्पष्ट परिभाषित करने का सुझाव दिया है। ताकि मेयर की स्थिति राज्य में मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव के अनुकूल हो। दोनों पक्षों को रूबरू बुलाकर समूचे घटनाक्रम को विराम देना चाहिए। यहां यह उल्लेखनीय है कि डीएलबी की ओर से धारा 39 के तहत मेयर से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद इस पत्र के कई मायने लगाए जा रहे हैं।



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Former MLA Gupta intervenes, writes to Chief Minister- giving notice through commissioner against the dignity of the Mayor
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