चार फेज में 68 दिनों के लॉकडाउन के बाद आम आदमी के लिए भले ही अनलॉक लागू हो गया, लेकिन 10 साल तक के बच्चों के लिए अभी भी लॉकडाउन की सख्ती बरकरार है। क्योंकि उनके बाहर निकलने पर पहले की तरह रोक है। केंदीय शिक्षा मंत्री के बयान के मुताबिक अगस्त से पहले स्कूल खुलने की उम्मीद नही है। यानी करीब एक महीने और बच्चों को इसी माहौल में घर रहना होगा। इसे करीब से समझने और इस समय को बच्चों के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने के लिए दैनिक भास्कर ने किड्स काउंसलर प्रमिलासिंह से टिप्स जाने। ये सुझाव पाठकों तक शेयर किए जा रहे हैं कि ताकि लॉकडाउन के समय को बच्चे बेहतर ढंग से बिता सके।
आपका छोटा सा प्रयास बच्चों को दे सकता है अनुशासन के साथ खुशियां
किड्स काउंसलर प्रमिलासिंह कहती है कि कोरोना संक्रमण में विश्व युद्धों के बाद पूरी दुनिया पूर्ण रूप से शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से पीड़ित हुई। फिलहाल इससे बचाव ही उपाय है। इसके लिए सोशल डिस्टेंस, साफ सफाई और मास्क लगाने की सख्ती से पालना हो। इस दौर में सबसे अभिभावक परेशान हैं। क्योंकि इनके लिए बच्चों को अनुशासन व रुटीन में रखना मुश्किल होता जा रहा है। पैरेंट्स चाहते हैं कि बच्चे मोबाइल और टीवी से नहीं चिपके रहें और अनुशासित भी रहें।
लगातार बच्चों के घर पर रहने के कारण पढाई के साथ उनका शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। बात-बात पर झगड़ा, शैतानी करना आदत बनते जा रहे हैं।
बच्चों को दें जिम्मेदारी : बच्चों को खाली वक्त में अलग-अलग टास्क दें। इससे उन्हें जिम्मेदारी का अहसास होगा। जैसे गमलों में पानी देना, फ्रीज में पानी की बोतल रखना, कचरा डस्टबीन में डालना, जूते चप्पल, बर्तन खिलौनों को तय जगह पर रखने की आदत डालें।
हॉबी पहचानने का सही वक्त
स्कूल बंद हैं। बच्चों के बाहर निकलने पर पाबंदी है। उनकी हॉबी पहचानने के लिए यह सही वक्त है। बच्चों को उनकी इच्छा के मुताबिक डांस, क्लरिंग, स्केचिंग, सिंगिंग सहित कुछ भी करने दें। आज कल स्कूलों के बाद होमवर्क और ट्यूशन में बच्चें इन चीजों पर सोच ही नहीं पाते हैं।
इन चार चीजों से बच्चों में नजर आएगा बदलाव
1. टाइम टेबल : बच्चों के सुबह उठने से रात को सोने सहित दिनभर कामों का एक शिड्यूल तय किया जाए। सुबह उठते ही बच्चों को छत या बॉलकनी में प्रकृति का अहसास करवाएं। इसके फायदे बताएं। रूटीन वर्क व नहाने के बाद पोष्टिक नाश्ता दें। इसके साथ ही अगला टास्क भी रिमांइड करवा दें।
2. नियमित पढाई : स्कूल की तरह घर में सुबह 10 से 12 बजे तक पढाई का रुटीन बनाएं। अंग्रेजी की स्पैलिंग्स और हिंदी व्याकरण की प्रेक्टिस करवाएं। मैथ्स व जीके में सिलेबस से बाहर की चीजें सिखाएं और होमवर्क दें। ताकि अगली क्लास की नींव अभी से मजबूत हो सके।
3. फन टाइम : इस खाली वक्त का जो पारम्परिक खेल से जोड़े हम इस तकनीकी दुनिया में भूलते जा रहे हैं, उन्हें खिलाए छत पर या नीचें है। घर के बरामदे में जैसे रस्सी कूद, प्रतियोगिता छुपम छुपाई, लंगड़ी टांग, खूब खेलने दें। आप भी चाहे तो खेल में बच्चे बन जाइए।
4. डिनर और टीवी : रात को खाने के बाद उन्हें टीवी भी देखने दें। इसमें कार्टून या पौराणिक धारावाहिक हो सकते हैं। महान पुरुषों की जीवनियां बच्चों को सुनाएं। ताकि उन्हें प्रेरणा मिल सके। क्योंकि स्कूल चालू रहने के दौरान बच्चे और अभिभावक दोनों व्यस्त रहते हैं।
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