कोरोना का कहर क्या होता है, इसे बीजेएस की मरुधर कंवर महसूस कर चुकी हैं। कोरोना से चाचा ससुर को खोने वाली मरुधर कंवर जब कोरोना की चपेट में आईं, तब उन्हें साढ़े आठ महीने का गर्भ था। यह सुन न केवल वह खुद, बल्कि पूरा परिवार सकते में आ गया।
तबीयत खराब होने पर हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा, लेकिन कोख में पल रही नन्ही जान काे बचाने के लिए हौसला नहीं खोया। ठान लिया था कि डिलीवरी से पहले हर हाल में कोरोना को हराना है, ताकि बच्चे पर कोई आफत ना आए। आत्मविश्वास और अनुशासन से उनकी रिपोर्ट निगेटिव आईं और दाे दिन बाद ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।
कोरोना से डिलीवरी डॉक्टर कराएंगे या नहीं, यही डर सताता रहा
बच्चे की सेफ्टी के लिए होम क्वारेंटाइन लिया था, लेकिन चिंता यह सताती थी कि कोरोना से डिलीवरी डॉक्टर कराएंगे या नहीं, कहीं वे मना तो नहीं करेंगे। इसी चिंता से ब्लडप्रेशर बढ़ गया और तबीयत खराब होने पर भर्ती होना पड़ा। हॉस्पिटल में सावधानी रखी।
मन ही मन ठान लिया था कि अब डिलीवरी होने से पहले कोरोना को हराना है। छोटी-मोटी कसरत के साथ खान-पान का ध्यान रखा। आत्मविश्वास के लिए मेडिटेशन किया। पति भी रोजाना फाेन कर हिम्मत देते रहे। इसी का नतीजा रहा कि डिलीवरी से पहले दो बार हुई जांच में निगेटिव आईं।
दो दिन बाद 21 मई को बच्ची को जन्म दिया। 26 को घर लौट आईं। अब वे और बच्ची दोनों स्वस्थ हैं। इतना ही कहना चाहती हूं कि थोड़ी सी भी लापरवाही नहीं बरतें। आपकी जान अापके परिजनों के लिए बहुत कीमती है। परिवार के लिए अपने आपको कोरोना से सुरक्षित रखें।
चाचा ससुर को लिवर की तकलीफपर हॉस्पिटल में कराया था भर्ती
मरुधर कंवर के चाचा ससुर रामसिंह को लिवर में तकलीफ के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जहां कोरोना सैंपल लिया गया और वे पॉजिटिव आए। इलाज के दौरान उनकी माैत हो गई। इसके बाद पूरे परिवार के सैंपल लिए गए थे। 9 मई को आई रिपोर्ट में मरुधर कंवर पॉजिटिव आईं।
वे बताती हैं कि फुलटाइम होने से डॉक्टरों से आग्रह कर होम क्वारेंटाइन हुई। खुद के पॉजिटिव आने की इतनी चिंता नहीं थी, जितनी बच्चे काे लेकर फिक्रमंद थीं। कई बार बुरे ख्याल इतने हावी हो जाते थे, कि घबराहट होने लगती थी। इस सबमें पति योगेेंद्रसिंह जोधा काफी मददगार रहे। वे मुझे मोटिवेट करते रहे, इसी वजह से वह चिंता से बाहर निकल पाईं।
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