बच्चाें के भविष्य काे संवारने में जितनी भूमिका मां की ममता और त्याग की हाेती है उतनी ही भूमिका पिता के आदर्शाें, संस्काराें और कड़ी मेहनत की भी हाेती है। बच्चे अपने पिता काे देखकर ही अपना रास्ता चुनते हैं। पिता भी बच्चाें के लिए खुद काे सर्वश्रेष्ठ उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने के लिए रात-दिन एक कर देते हैं। 21 जून रविवार काे फादर्स डे है। इस अवसर दैनिक भास्कर ने शहर के ऐसे बेटाें की कहानी तलाश की जिन्हाेंने पिता के आदर्शाें पर चलकर आज एक मुकाम हासिल किया।
आदर्श:पिता को देखकर सफल डॉक्टर बने डॉ. साकेत, डाॅ. एसके गाेयल और डाॅ. साकेत गाेयल
शहर के वरिष्ठ कार्डियाेलाॅजिस्ट डाॅ. साकेत गाेयल के पिता डाॅ. एसके गाेयल सिनियर फिजिशियन हैं। डाॅ. साकेत बताते हैं कि मैंने बचपन से पिता काे मरीजाें की सेवा करते देखा। वे एक-एक मरीज काे पूरी गंभीरता और ईमानदारी से देखते थे। यही दृश्य देखते देखते बड़ा हाे गया और जब खुद के प्राेफेशन के चयन की बात आई ताे उनकी छवि दिलाे दिमाग में छाई रही।
इसी वजह से मैंने डाॅक्टर बनने की ठानी। उनसे हमेशा एक बात सीखी कि डाॅक्टरी के पेशे में व्यावसायिक हाेने की बजाए व्यावहारिक हाेना चाहिए। उन्हीं आदर्शाें काे मैंने अपने जीवन में उतारा और आज जाे भी हूं उन्हीं के मार्गदर्शन से हूं।
संस्कार:डॉक्टर पिता ने पूरी जिंदगी गांवों में मरीजों की सेवा की, उनकी सीख की बदौलत आईएएस बने कपिल
सिक्किम की राजधानी गंगटाेक में लंबे समय तक कलेक्टर रहे और हाल ही में हायर एजुकेशन में डायरेक्टर बने कपिल मीणा आईएएस हैं। वे काेटा निवासी डाॅ. डीसी मीणा व पूर्व जिला प्रमुख कमला मीणा के बेटे हैं। कपिल बताते हैं कि पिता डाॅक्टर थे। उनकी पाेस्टिंग अधिकतर गांवाें में रही। उन्हाेंने कभी इसके लिए इंकार नहीं किया। गांवाें में मरीजाें की सेवा करना उन्हें काफी अच्छा लगता था।
उन्हीं से जनसेवा सीखी और उन्हीं के आदर्शाें काे अपनाकर आईएएस बनने का फैसला किया। परिवार में माहाैल ही इस तरह का मिला कि आज जाे भी हूं वाे उसी की बदाैलत हूं।
प्रेरणा:एडवोकेट पिता के पदचिन्हों पर चलकर आम लोगों को न्याय दिलाने के लिए मजिस्ट्रेट बन गए गौरव
मजिस्ट्रेट गाैरव शर्मा अपने पिता वरिष्ठ एडवाेकेट भगवती वल्लभ शर्मा के बारे में बताते हैं कि पिता के दिए आदर्शाें ने इस मुकाम काे हासिल करने के लिए प्रेरित किया। पिता के कार्य से प्रभावित हाेकर ही मैंने एलएलबी की और वकालत काे ही पेशा चुना।
वे हमेशा मुझसे कहते थे कि पैसा कमाने के बारे में मत साेचाे, तुम्हें अफसर बनना है, जिससे आम लाेगाें काे न्याय दिला सकाे। मैंने शुरू से पिता से ईमानदारी और हार्डवर्क सीखा। आरजेएस की तैयारी शुरू की। तैयारी के दाैरान मेरे केस और सारे काम मेरे पिता संभालते थे। ये सब पिता के कारण ही संभव हाे सका।
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