राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस काे वाेट देने पर माकपा ने साेमवार काे अपने भादरा विधायक बलवान पूनियां काे एक साल के लिए सस्पेंड कर दिया है। पार्टी की राज्य इकाई ने अनुशासनहीनता के आरोप में यह कार्यवाही करते हुए 7 दिन में इस बात का जवाब भी मांगा है कि पार्टी की सहमति के बगैर वे वाेट देने क्याें गए?
माकपा के प्रदेश में पूनियां सहित कुल दाे विधायक हैं। दूसरे विधायक गिरधारीलाल ने पार्टी के दिशा-नर्देश की पालना करते हुए 19 जून काे हुए राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं किया था। पार्टी के राज्य सचिव काॅमरेड अमराराम ने बताया कि केंद्रीय कमेटी ने निर्णय लिया था कि राज्यसभा चुनाव में उनका काेई विधायक वाेट नहीं देगा। यह अादेश इसलिए दिया गया था, क्याेंकि माकपा के वाेट से राज्यसभा चुनाव में काेई फर्क नहीं पड़ रहा है।
आदेश में कहा गया था कि बीजेपी काे हराना हमारा लक्ष्य था, इसलिए हमें वाेट तब देना था, जब कांग्रेस काे हमारी जरूरत हाेती। चूंकि कांग्रेस के पास वैसे ही भाजपा काे हराने के लिए पूरे आंकड़े थे। ऐसे में हमने निर्णय लिया था कि वाेट नहीं करेंगे। पूनियां ने इन निर्देशाें की पालना नहीं की।
इसके अलावा राज्यसभा चुनाव में माकपा की ओर से नियुक्ति प्रतिनिधि संजय माधव से भी पूनियां अपना वाेट देने से पहले और बाद में नहीं मिले। प्रदेश में 19 जून को राज्य सभा की तीन सीटाें के लिए मतदान हाेना था। तीन सीटाें पर कांग्रेस के दाेनाें प्रत्याशी जीते, जबकि भाजपा के एक प्रत्याशी काे विजय मिली, जबकि दूसरा प्रत्याशी हार गया।
भाजपा का अहंकार याद आ रहा था, खुद काे राेक नहीं सका : पूनियां
भाजपा विधायकाें का अहंकार मेरी आंखाें के सामने बार-बार आ रहा था। मैं खुद काे भाजपा के खिलाफ वाेट करने से राेक नहीं सका। चूंकि भाजपा काे हराना हमारा लक्ष्य था। ऐसे में मैंने वाेट किया।
- बलवान पूनियां, विधायक माकपा
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