पॉलिटिकल रिपोर्टर. जोधपुर| गर्मियों का मौसम आते ही सब जगह पानी का संकट विकराल रूप ले लेता है। राजस्थान में भी पानी का संकट है। इसे लेकर हमेशा की तरह राजनीति जोरों पर हैं। जोधपुर में रविवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत और प्रदेश के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी आमने सामने हो गए। दोनों ने रविवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आरोप लगाए।
भाजपा: विफलता का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की बजाय गहलोत सरकार गंभीर हो
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत ने राजस्थान सरकार से पूछा कि गरीबों के घर में पानी पहुंचे और माताओं-बहनों को मटका उठाकर चलने से मुक्ति मिले, क्या ये राज्य सरकार की प्राथमिकता है या नहीं? उन्होंने नसीहत दी कि अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की बजाय राज्य सरकार जल जीवन मिशन पर गंभीरता के साथ काम करे।
उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में पूरे देश का बजट 5 हजार करोड़ होता था, लेकिन मोदी सरकार साढ़े तीन लाख करोड़ का बजट लेकर देश के हर घर तक पीने का पानी पहुंचा रही है। राज्य सरकारों ने बढ़े हुए पैसों को रेवड़ियों की तरह बांट दिया। आर्थिक प्रबंधन नहीं करने के कारण से ये परिस्थिति पैदा हुई। अब वो केंद्र को सामने रखकर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे राज्य के जलदाय मंत्री बीडी कल्ला और मुख्यमंत्री (जो वित्त मंत्री भी हैं) से कहूंगा कि वो ये स्पष्ट करें कि केंद्रीय कर राजस्व में राज्यों की 32 से 42 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ने से जो पैसा आया, उसे वो क्यों नहीं प्राथमिकता तय करके जल जीवन मिशन में लगाते हैं।
उन्होंने कहा कि या तो वो सुनिश्चित करें कि पानी की हमारी प्राथमिकता नहीं है, जो राज्य सरकार का काम है। हम उसको पूरा करने केलिए 50 प्रतिशत पैसा दे रहे हैं, फिर भी वो अपनी मजबूरी दिखा रहे हैं। केंद्र से मिले पैसों में से केवल 21 प्रतिशत ही खर्च कर पाए और अब मुख्यमंत्री और जलदाय मंत्री पत्र लिख कर राजस्थान की ग्रांट को 90 प्रतिशत करने की बात कर भ्रम फैला रहे हैं।
शेखावत ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के मित्र मेरे ऊपर कटाक्ष कर रहे थे कि सांसद नहीं आए। मैं एक बार उनसे पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस का उम्मीदवार कहां है? सरदारपुरा का विधायक कहां है?
कांग्रेस : जनता जल योजना में 10 फीसदी जन भागीदारी का नियम वापस करवाएं शेखावत
प्रदेश के राजस्व मंत्री हरीश चौधरी ने रविवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत के मंत्रालय पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि जनता जल योजना में जनता की 10 फीसदी भागीदारी के कारण रेगिस्तानी जिलों में लोगों को दिक्कत हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मेरी शेखावत से मंत्री व सांसद के होने के नाते अपील है कि वे इस नियम में संशोधन करवाकर लोगों को राहत दिलाएं।
सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी इलाकों के लोगों के लिए 10 फीसदी जन भागीदारी का प्रावधान किया गया हैं। ये हमारे लिए छूट की बजाय मुसीबत बन गया हैं। जहां एक ओर पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत दी गई, लेकिन रेगिस्तान में रहने वालों को राहत की बजाय दस फीसदी जन भागीदारी का नियम थोपा गया हैं।
जैसे किसी भी ढाणी के आगे से पाइप लाइन निकले और उसे कनेक्शन नहीं दिया जाएगा। ये नियम गलत हैं। राजीव गांधी लिफ्ट नहर के तीसरे फेज के लिए योजना बनाई गई है, इसमें सिर्फ शहर को ही पानी देने का प्रावधान किया गया है। इस बारे में चौधरी ने कहा कि स्कीम का शेयर केंद्र से कितना मिलेगा? क्या केंद्र पहले की तरह शेयर 90 फीसदी हिस्सा देगी।
स्कीम के नियम किस आधार पर बनाए गए हैं। इस बारे में बात करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मैंने लगातार शेखावत व उनके मंत्रालय को चिट्ठी भेजी। तमाम योजनाओं काे रोक दिया गया। राजस्थान के किसानों के सीएडी के माध्यम से कार्य सौ फीसदी रोके गए हैं। टिड्डी के बारे में चौधरी ने कहा कि डब्ल्यूएचओ और विश्व खाद्य संगठन की चेतावनी दी उसे केंद्र ने नजरअंदाज किया। उसे गंभीरता से नहीं लिया।
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