कोई 10 साल हर घड़ी के ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और समय की बर्बादी से जूझते झोटवाड़ा पुलिया से गुजरने वालों को फिलहाल राहत मिलती नहीं दिख रही। कहने को जेडीए ने काम पूरा करने की जो डेडलाइन तय की थी, वह 5 महीने बाद (दिसंबर 2020) पूरा होने को है, लेकिन फिलहाल मौके पर एक तिहाई काम भी नहीं हो पाया है। जो कि जेडीए की इंजीनियरिंग, जोन के आरएएस और जेडीसी स्तर तक की फैलियर रही है।

दो साल यानी जून 2018 से अब तक तक महज 25-30 करोड़ के काम हो पाए हैं। पूरा काम 108 करोड़ का है। इससे अलग नतीजों से बेपरवाह रहने वाले बुकिंग मास्टरों ने 58 करोड़ के टेंडर और कर लिए। जिससे एलिवेटेड से इतर सर्विस रोड, रिटेनिंग वॉल, यूटीलिटी लाइनों की शिफ्टिंग होनी है। इनके नतीजे भी निराशाजनक है। बता दें कि मौजूदा संकरी पुलिया से लगती तीन लेन एलिवेटेड बननी है, इससे यहां से गुजरने वाले करीब 6 लाख लोगों को सहूलियत मिलेगी।

व्यापारी तैयार थे, जेडीए फेल रहा...कम से कम डेढ़ साल डिले
बीजेपी सरकार में काम शुरू करते समय जेडीए ने प्रभावित व्यापारियों से बात की थी। 604 दुकानों के लिए करीब सभी सात व्यापार मंडलों ने अपनी सहमति दी। इसके बाद जेडीए अपने वादों और काम से बैकफुट पर रहा। पुनर्वास के काम को टालते रहे तो अधूरी प्लानिंग से बात की। मौजूदा हालात में काम पूरा करने में करीब डेढ़ साल और लगेंगे। इसलिए लिए भी पुनर्वास के मुद्दों पर काम करना होगा तो फेल रहे इंजीनियरिंग सिस्टम को मजबूत कर नतीजे लाने होंगे।

^दुकानों के पुनर्वास पर काम निर्भर करता है। दूसरी समस्याओं पर धीरे-धीरे पार पा रहे हैं। कच्ची बस्ती हट गई। फर्म को लेबर बढ़ाने को कहा है। फिलहाल 70 के आसपास मजदूर हैं, जिनकी संख्या कम से कम 150 होनी चाहिए। -देवेंद्र गुप्ता, एडिशनल चीफ इंजीनियर, जेडीए

^मैंने तो हाल ही ज्वाइन किया है। जल्द ही प्रोजेक्ट की जानकारी लेकर जरूरी नतीजों पर काम करेंगे।|
-अशोक योगी, संबंधित उपायुक्त जोन-6



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झोटवाड़ा एलिवेटेड
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