जाेधपुर में जुलाई के 17 दिन में नाै बार 100 से ज्यादा काेराेना पॉजिटिव मिल चुके हैं। चिकित्सा विभाग इसका कारण ज्यादा सैंपलिंग बता रहा है, लेकिन एक और कारण है... खुद विभाग की लापरवाही। ऐसे दाे उदाहरण शुक्रवार काे सामने आए। पहला पॉजिटिव मरीजों काे घर व दूसरा गांव से अस्पताल लाने का। दाेनाें कर्मियाें ने पीपीई किट नहीं पहना था। गांव में ताे मास्क भी नदारद था। ऐसे में ये सुपर स्प्रेडर बन गए ताे हालात बिगड़ सकते हैं।
पीपीई किट नहीं: एंबुलेंस कर्मी
शाम साढ़े 4 बजे नागाैरी गेट से 108 एंबुलेंस दाे मरीजों काे लेकर एमजीएच पहुंची। ड्राइवर-ईएमटी ने सिर्फ मुंह पर मास्क व ग्लव्ज पहने थे, जबकि बिना पीपीई किट पहने मरीज काे एंबुलेंस कर्मी नहीं ला सकते हैं। जब भास्कर ने उनसे पीपीई किट का पूछा ताे उन्होंने साफ कह दिया कि हमारे पास नहीं है।
बाप में गुरुवार काे मिले संक्रमितों काे बाेराेनाडा काेविड केयर सेंटर में भर्ती करने के लिए 108 एंबुलेंस पहुंची थी, लेकिन एंबुलेंस कर्मियाें ने ना ताे मास्क पहना था और ना ही पीपीई किट। माैके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी मास्क नहीं पहना था, जबकि माैके पर संबंधित पीएचसी-सीएचसी इंचार्ज मौजूद थे।
- बीसीएमओ बाप डॉ. दाऊलाल चौहान का कहना है कि पीपीई किट दिए हुए हैं। अगर एंबुलेंस कार्मिक ने मास्क और पीपीई किट नहीं पहन रखा है तो यह बहुत बड़ी गलती है। इस संबंध में मौके पर साथ गए सीएचसी इंचार्ज से बात करूंगा।
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