स्वयं विघ्नहर्ता गणेशजी महाराज के 22 अगस्त को जन्मोत्सव पर कोरोना का विघ्न पड़ने जा रहा है। कोरोना विघ्न के कारण झालावाड़ शहर में 10 सालों की परंपरा टूटने जा रही है। 10 दिवसीय गणेशोत्सव के तहत हर साल अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाला विसर्जन जुलूस इस साल नहीं निकलेगा। गणेश के भक्त इस शोभायात्रा का सालभर इंतजार करते हैं।
इस यात्रा की उत्सुकता ये है कि 5 किमी लंबे यात्रा मार्ग में 100 मंच लगते हैं, जिन पर दिल्ली, मुंबई और गुजरात की झांकियां प्रदर्शन करती हैं। 35 गणेश प्रतिमाएं एक के बाद एक निकलती हैं। स्वचालित झांकियां, हाथी, घोड़े, ऊंट और 10 से ज्यादा मशहूर बैंड, अखाड़े से सुसज्जित विसर्जन जुलूस जो सुबह 11 बजे बस स्टैंड सर्किल से 15 हजारों लोगों के सानिध्य में प्रारंभ होकर रात 10 बजे तक चलने वाले इस विसर्जन जुलूस और इसमें शामिल हजारों लोगों की भीड़ इस बार देखने को नहीं मिलेगी। क्योंकि, इतने लोगों को भीड़ प्रशासन एकत्र नहीं होने देगा और न ही इसकी स्वीकृति मिलेगी।
समितियों ने भी शोभायात्रा नहीं निकालने का निर्णय लिया
गणेशोत्सव आयोजन समितियों ने भी शोभायात्रा नहीं निकालने का निर्णय लिया है। शेष अन्य गतिविधियों के लिए इन समितियों को प्रशासन की स्वीकृति और शहर की सभी गणेश समितियों की होने वाली सामूहिक बैठक का इंतजार है। इस बैठक में ही 10 दिवसीय गणेश महोत्सव के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय होती है। गणेश समितियों के प्रमुख प्रतिनिधि संजय जैन ताऊ, शैलेंद्र यादव व वीरेंद्रसिंह झाला ने बताया कि हर साल अनंत चतुर्दशी पर निकाले जानी वाले विसर्जन जुलूस में हजारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं। कोरोनाकाल में लोगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। यात्रा में सोशल डिस्टेंसिंग संभव नहीं और न ही प्रशासन इसकी अनुमति देगा, इसलिए फिलहाल तो इसको टाल दिया है।
गढ़ गणेश पर नहीं होगी विशाल प्रतिमा स्थापित, कार्यक्रम भी सूक्ष्म
सिद्धि श्री गढ़ गणपति सेवा समिति के लोकेश शर्मा ने बताया कि इस बार समिति द्वारा निर्णय लिया गया है कि गणेशोत्सव सूक्ष्म रूप में मनाया जाएगा। हर बार आठ से 10 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती थी, लेकिन इस बार मंदिर में ही छोटी प्रतिमा विराजमान की जाएगी। अलग से पांडाल भी नहीं लगाया जाएगा। अन्य कार्यक्रमों को छोटा किया गया है, ताकि वह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ संपन्न हो जाए। कोरोना को देखते हुए इस बार कार्यक्रम शाॅर्ट किया है।
बाहर से नहीं आ सकते दिल्ली-मुंबई के कलाकार
गणेश समितियों का कहना है कि इस बार गणेशोत्सव पर पहले जैसी रौनक नहीं रहेगी। पहले जुलूस में शामिल होने के लिए बाहर के कलाकार दिल्ली, मुंबई व अन्य स्थानों से आते थे। इसमें पंजाब का अखाड़ा व शिव बारात जिसमें बाहर के कलाकार आते थे। इसके अलावा उज्जैन-इंदौर की तोपें आदि भी नहीं आ सकती, क्योंकि बस व ट्रेनें बंद हैं।
ये होते थे आकर्षण के केंद्र
पिछले साल गणेश महोत्सव पर समितियों ने जोर-शोर से तैयारियां की थी, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। गत वर्ष अनंत चतुर्दशी के मुख्य आकर्षण में जुलूस मार्ग पर 200 तोरण द्वार, करीब 2 हजार बैनर, स्वागत के लिए 300 स्टॉल, झांकियों के प्रदर्शन के लिए विभिन्न चौराहों पर 200 मंच, इंदौर-उज्जैन की तोपें, 35 विशालकाय गणेश प्रतिमाएं, 100 बैंड, 50 डीजे आदि शामिल होते थे।
छोटी प्रतिमाओं का निर्माण
खंडिया तिराहा पर छह माह पहले ही गणेश मूर्तियों का निर्माण शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार अभी तक बड़ी प्रतिमाओं के आर्डर नहीं मिले हैं। ऐसे में मूर्तिकार द्वारा छोटी प्रतिमाएं अधिक बनाई जा रही हैं। ऐसे में छोटी प्रतिमाओं को ही रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकार का कहना है कि आर्डर मिलेगा तो बड़ी प्रतिमाएं भी बनाएंगे।
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