(आरिफ कुरैशी)राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं काॅमर्स में पिछले पांच साल में ही करीब 15 हजार विद्यार्थी कम हो गए हैं। यह संख्या लगातार कम हाे रही है। 2016 में जहां कॉमर्स के विद्यार्थियों की संख्या 51 हजार 524 थी, 2020 में यह घटकर 36 हजार 551 ही रह गई है। इसके लिए शिक्षा विभाग की अनदेखी को भी जिम्मेदार माना जा रहा है।
कॉमर्स के प्रति विद्यार्थियों की लगातार कम हो रही रूचि को बढ़ाने के लिए जरूरी हो गया है कि रीट और सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती में कॉमर्स के विद्यार्थियों के लिए अवसर जुटाए जाएं। बोर्ड की 2020 की 12वीं कक्षा के लिए साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स में इस बार कुल 8 लाख 70 हजार से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत किए गए।
इनमें सबसे कम कॉमर्स के लिए मात्र 36 हजार 551 ही थे। साइंस में संख्या 2 लाख 39 हजार और सबसे अधिक आर्ट्स में 5 लाख 90 हजार से अधिक है। बोर्ड ने साइंस व कॉमर्स के परिणाम जारी कर दिए हैं, अब 12वीं कला वर्ग के परिणाम का इंतजार है।
कॉमर्स में ऐसे घटी संख्या
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 12वीं कॉमर्स के बीते पांच साल के परीक्षार्थियों पर नजर डालें तो मालूम होगा कि 2016 में 51524 , 2017 में 48113, 2018 में 42665, 2019 में 41651 एवं 2020 में 36551 छात्रों ने वाणिज्य से परीक्षा दी।
हर साल घटे विद्यार्थी
2016 की तुलना में 2017 में 3411 विद्यार्थी कम हुए। कम होने वाले विद्यार्थियों की रफ्तार यहीं नहीं थमी। 2018 में यह संख्या बढ़ कर 5448 तक कम हो गई। 2019 मे 1050 और 2020 में 5100 विद्यार्थी 12वीं कॉमर्स में कम हुए। जब 12वीं कक्षा में यह हाल है तो कॉलेज एजूकेशन की स्थिति का भी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
रोजगार के सीमित अवसर, हाशिए पर पहुंची वाणिज्य शिक्षा
राजस्थान वाणिज्य शिक्षा संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजय सिंह डूकिया ने कहा कि रोजगार के सीमित अवसरों के चलते प्रदेश के युवाओं में आर्थिक कौशल बढाने वाली वाणिज्य शिक्षा खुद हाशिए पर पहुंच गई है। वाणिज्य के छात्रों में लगातार कमी के बाद भी प्रदेश का शिक्षा विभाग मौन है। डूकिया ने कहा कि अगर शिक्षा विभाग की अनदेखी इसी प्रकार चलती रही तो प्रदेश में वाणिज्य शिक्षा पढ़ने वाले छात्रों के टोटे पड़ जाएंगे।
आरबीएसई स्कूल कम हो रहे हैं
सीए अंजुल जैन बताते हैं कि कॉमर्स का स्कोप कम नहीं है, सीए व सीएस के साथ ही एमबीए में भी बराबर डिमांड है, लेकिन कुछ समय से यह हो रहा है कि आरबीएसई के अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की संख्या कम हाे रही है। शहरी क्षेत्रों के स्टूडेंटस में कॉमर्स का क्रेज है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों का रूझान विज्ञान और कला विषय की ओर अधिक है। कॉमर्स से प्रोफेशनल डिग्री की ओर से बच्चे बढ़ रहे हैं।
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