(प्रेरणा साहनी) कई सालाें से इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएफआई) राजस्थान के घुड़सवार खिलाड़ियाें के साथ मनमानी कर रहा है। ईएफआई नियमाें का उल्लंघन कर आर्मी यूनिट्स, क्लब्स और इंडीविजुअल मेंबर्स काे वाेटिंग का अधिकार दे रही है। जबकि, सिर्फ स्टेट इक्वेस्ट्रियन एसाेसिएशन के पास ही ये हक हाेना चाहिए।

बता दें कि इन वाेटाें के आधार पर ही ईएफआई काे संचालित करने वाली आर्मी सर्विस काॅर्प्स (एएससी) की एग्जीक्यूटिव कमेटी में 23 सदस्य चुने जाते हैं। ईएफआई से अभी 19 स्टेट इक्वेस्ट्रियन एसाेसिएशन संबद्ध हैं। इनमें हर एसाेसिएशन के सिर्फ दाे वाेट हैं यानी सभी एसाेसिएशन के कुल 38 वाेट ही हैं। जबकि, ऐसे ही लगभग 300 क्लबों के पास कुल 600 वाेट हैं। इसके अलावा ईएफआई सभी क्लब व इंडिविजुअल्स काे सीधा सदस्य बनाती है।

यही सदस्य प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं। मगर उन्हें राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने का दर्जा नहीं मिलता। ऐसे में वे राज्य के किसी अवार्ड और अनुदान के हकदार नहीं हाेते। इसलिए, राजस्थान एसाेसिएशन ने ईएफआई के खिलाफ गत सितंबर में दिल्ली हाईकाेर्ट में रिट पिटीशन लगाई थी। 13 जुलाई काे सुनवाई है।

इंडिविजुअल काे वाेटिंग का अधिकार देकर एसोसिएशन का हक मार रहे हैं

देश की हर एनएसएफ में वाेटिंग का अधिकार सिर्फ उन एसाेसिएशन काे है जिनके राज्य में एक खेल के लिए एक स्पाेर्ट्स एसाेसिएशन है। जबकि ईएफआई ने सभी क्लब, इंडिविजुअल और यूनिट मेंबर्स काे वाेट देने का अधिकार दिया है, जो सही नहीं है।

रघुवेन्द्र सिंह डूण्डलाेद, प्रेजीडेंट, राजस्थान इक्वेस्ट्रियन एसाेसिएशन

ईएफआई सरकार के स्पाेर्ट्स काेड का उल्लंघन कर रही, जाे गलत है

ईएफआई का नियंत्रण आर्मी के पास है, लेकिन वाे खुद सरकार द्वारा बनाए स्पाेर्ट्स काेड की अवहेलना कर रही है, जाे सरासर गलत है। एग्जीक्यूटिव कमेटी के प्रेजीडेंट का पद आर्मी के सर्विंग ऑफिसर के पास हाेता है। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के बजट पर काेई ऑफिसर सिविल ऑर्गनाइजेशन कैसे चला सकता है?

कर्नल राजेश पट्टू, पूर्व सीओ 61 कैवलरी जयपुर



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फाइल फोटो
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