रीट परीक्षा में टीएसपी क्षेत्र के केवल अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों को 60% की जगह 36% लाने की छूट देने वाले गजट नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई उच्च न्यायालय द्वारा की गई। प्रतापगढ़ निवासी हर्षित टेलर एवं अन्य की और से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ऋतुराज सिंह राठौड़ ने कोर्ट को बताया कि राज्यपाल द्वारा 29 अगस्त 2012 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर रीट परीक्षा में अनुसूचित क्षेत्र के केवल अनुसूचित जनजाति को छूट देते हुए रीट परीक्षा में न्यूनतम प्रतिशत 60 से घटा 36 कर दिए।
नोटिफिकेशन में यह बताया गया था कि संविधान की 5वीं अनुसूची के भाग 5 में प्रदत्त शक्ति का उपयोग करते हुए आरटीई एक्ट की धरा 23 (1) में इस प्रकार तबदीली की जाती है कि टीएसपी क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार अध्यापक नियुक्ति के लिए योग्य होंगे अगर वह परीक्षा में 36 प्रतिशत अंक लाते है।
अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि संविधान की 5वीं अनुसूची के भाग 5 में राज्यपाल को शक्ति दी गई है कि वे आदेशित कर सकते हैं। संसद और विधानसभा द्वारा पारित कोई भी कानून या अधिनियम टीएसपी क्षेत्र में तबदीली के साथ लागू हो सकता है।
जबकि 2012 नोटिफिकेशन द्वारा आरटीई एक्ट में इस प्रकार तबदीली की गई की न्यूनतम प्रतिशत की छूट 5 वीं अनुसूची के भाग 5 के अनुसार सम्पूर्ण टीएसपी क्षेत्र को न देकर केवल अनुसूचित जनजाति उम्मीदवारों को दी गई जो की गैर संवैधानिक है। क्योंकि 5वीं अनुसूची के भाग 5 के अनुसार किसी भी कानून में तबदीली टीएसपी क्षेत्र के लिए की जा सकती है, न कि टीएसपी क्षेत्र के किसी समुदाय या जाती विशेष के लिए।
अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद न्यायाधीश संगीत लोढ़ा एवं न्यायधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ ने सरकार से जवाब तलब कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Via Dainik Bhaskar https://ift.tt/1PKwoAf
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें