मुकंदरा टाइगर रिजर्व में गुरुवार सुबह बाघ एमटी-3 ने दम ताेड़ दिया। इस टाइगर की माैत से वन विभाग की व्यवस्था पर सवाल खड़े हाे गए हैं। एमटी-3 काे कई दिनाें से पिछले बाएं पैर से चलने में परेशानी थी। अधिकारियाें काे 18 जुलाई काे इसकी जानकारी भी मिल गई थी। इसके बावजूद विशेषज्ञाें काे बुलाने की बजाए 5 दिन तक स्थानीय स्तर पर ही इलाज की काेशिश चलती रही।
टाइगर की हालत ज्यादा बिगड़ी ताे बुधवार काे रणथंभाैर से डाॅक्टर की टीम पहुंची, लेकिन अंधेरा हाेने की वजह से वाे ट्रैंक्युलाइज नहीं हाे पाया। इसका नतीजा ये हुआ कि गुरुवार सुबह टाइगर ने वन विभाग की टीम के सामने ही दम ताेड़ दिया।
रणथंभाैर रिजर्व से टाइगर टी-98 पिछले साल फरवरी में खुद ही मुकंदरा में आया था। पिछले डेढ़ साल से इसका दरा और गागराेन रेंज में मूवमेंट था। पिछले कुछ दिनाें से ये एक पैर से लंगड़ाकर चल रहा था। इस मामले में सबसे बड़ी लापरवाही ये रही कि माॅनिटरिंग टीम ने 18 जुलाई काे ही बता दिया था कि एमटी-3 पिछले बाएं पैर से लंगड़ाकर चल रहा है और उसे सांस लेने में परेशानी हाे रही है। 19 जुलाई काे मेडिकल टीम माैके पर पहुंची, लेकिन उसे ट्रैंक्युलाइज नहीं कर सकी।
इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर ही इसके इलाज की काेशिश हाेती रही। डाॅक्टराें ने दवा डालकर एक पाड़ा भी बांधा, लेकिन टाइगर ने उसे खाया ही नहीं। टाइगर की हालत ज्यादा खराब हुई ताे बुधवार काे रणथंभाैर से टीम बुलवाई गई, लेकिन वाे भी शाम काे पहुंच सकी। गुरुवार सुबह टीम ट्रैंक्युलाइज के लिए पहुंची। इस दाैरान टीम के सामने ही टाइगर ने सुबह 5.55 बजे दम ताेड़ दिया।
टाइगर की मौत के कारण और वो सबकुछ जो जानना जरूरी
1 फेफड़े में संक्रमण और हार्ट में ब्लॉकेज की वजह से टाइगर की मौत हुई। माॅनिटरिंग टीम काे ये भी पता चल गया था कि पिछले पैर से लंगड़ाकर चलने के अलावा एमटी-3 काे सांस लेने में भी परेशानी हाे रही है। इसके बावजूद पैर में मामूली चाेट मानकर ही इलाज की काेशिश की जाती रही। इसकी वजह से उसे सही इलाज नहीं मिल सका।
2 इलाज की असफल कोशिश भी उसकी मौत की वजह बनी। विभाग ने उसके इलाज के लिए पाड़े में दवा डालकर बांधा। लेकिन कमजोरी की वजह से बाघ शिकार नहीं कर सका। रणथंभौर से मेडिकल टीम को बुलाने में भी देरी की।
3 रणथंभाैर से काेटा के लिए चली मेडिकल टीम काे मंडाना टाेल नाके पर करीब पाैने घंटे तक टाेल वालाेें ने राेक दिया। इससे टीम काे दरा पहुंचने में देर हाे गई। टीम को दरा पहुंचने में रात हो गई अाैर इलाज शुरू नहीं कर सकी। यदि समय रहती टीम पहुंचती ताे उसकी जान भी बच सकती थी।
कार्डियक अरेस्ट और फेफड़े में संक्रमण से हुई माैत, पिछले पैर में काेई चाेट नहीं
एमटी-3 बाघ का पाेस्टमार्टम करने वाले मेडिकल बाेर्ड में शामिल रणथंभाैर टाइगर रिजर्व के सीनियर वेटेरनरी डाॅ. राजीव गर्ग ने बताया कि प्रारंभिक रूप से बाघ की माैत कार्डियक अरेस्ट यानी हाॅर्ट फेल हाेने से हुई हैं। हाॅर्ट का चैंबर पूरीे तरह ब्लाॅक निकला है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन नहीं हाे पा रहा था। साथ ही फेफड़ाें में संक्रमण भी सामने आया है। डाॅ. गर्ग ने बताया कि फेफड़ाें में संक्रमण दूषित पानी, भाेजन या हवा से भी हाे सकता है। यह तीन-चार दिन से भूखा भी था। पेट पूरा खाली मिला है। इसके सैंपल इंडियन वेटेरनरी रिसर्च सेंटर देहरादून सहित अन्य स्थानाें पर भिजवाएं जाएंगे।
इसके बाद ही फाइनल रिपाेर्ट तैयार करेंगे। डाॅ. गर्ग ने बताया कि बाघ के पूरे शरीर की जांच-पड़ताल की है, जिसमें किसी भी तरह की चाेट नहीं मिली है। उन्हाेंने बताया कि संभवतया इसे हार्ट में प्राॅब्लम की वजह से पिछले पैर से चलने में परेशानी हाे रही थी। रिजर्व के सीनियर वेटेरनरी डाॅ. तेजेंद्रसिंह रियाड़ ने बताया कि इसके ब्लड, लीवर, फेफड़े सहित अन्य अंगाें से सैंपल लिए हैं। उसका कोरोना सैंपल भी लिया गया है।
वाटर पाॅइंट से 10 मीटर दूर गिर पड़ा, फिर नहीं उठा
गुरुवार सुबह 5:30 बजे टीम टिपणिया महादेव एरिया में पहुंची। वहां एमटी-3 वाटर पाॅइंट पर बैठा हुआ था। इस दाैरान टीम वाटर पाॅइंट से कुछ दूरी पर वाहन पर ही बैठी रही। कुछ देर ऑबजर्वेशन के बाद करीब टीम वाहन लेकर करीब 250 मीटर पीछे आ गई। इसके बाद बाघ वाटर पाॅइंट से उठकर खड़ा हुआ। करीब 10 मीटर चलने के बाद अचानक लड़खड़ाकर बैठ गया।
डाॅक्टर उसकी हालत पर नजर बनाए रहे। करीब 25 मिनट तक उसकी बाॅडी में काेई मूवमेंट नहीं हुआ ताे टीम पास गई। सुबह 5.55 बजे माैत की घाेषणा हुई। पाेस्टमार्टम के बाद दरा रेस्ट हाउस के पिछले हिस्से में पुलिस, प्रशासनिक एवं वन विभाग के अधिकारियाें की माैजूदगी में उसका राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ।
भारत में 8 साल में 750 बाघों की मौत, इस दौरान राजस्थान में 17 टाइगर्स ने दम ताेड़ा
भारत में 8 साल में 750 बाघ मारे गए हैं। एनटीसीए ने आरटीआई के तहत दी गई जानकारी में बताया कि 369 बाघों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई तथा 168 की मौत शिकार से हुई। 70 मौतों के बारे में अभी जांच चल रही है, जबकि 42 बाघों की मौत दुर्घटना और संघर्ष की घटनाओं से हुई। 2012 से 2019 तक 8 साल की अवधि के दौरान देशभर में 101 बाघों के अवशेष भी बरामद हुए।
मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 173 बाघों की मौत हुई। महाराष्ट्र में 125, कर्नाटक में 111, उत्तराखंड में 88, तमिलनाडु में 54, असम में 54, केरल में 35, उत्तर प्रदेश में 35, राजस्थान में 17, बिहार और पश्चिम बंगाल में 11 तथा छत्तीसगढ़ में 10 बाघों की मौत हुई है।
प्रदेश में 3 बाघाें की माैत शिकार की वजह से : महाराष्ट्र और कर्नाटक में 28-28 बाघों का हुआ। असम में 17, उत्तराखंड में 14, उप्र में 12, तमिलनाडु में 11, और राजस्थान में 3 का शिकार हुआ।
मुकंदरा में हाे चुकी 3 टाइगर की माैत : मुकंदरा में 17 सालाें में तीन बाघाें की अकाल माैत हाे चुकी है। ब्राेकन टेल की 15 जुलाई 2003, मार्च 2016 में बाघिन टी-35 की माैत हाे चुकी है।
टूरिस्ट का पसंदीदा टाइगर था एमटी-3
इस बाघ काे मैं शुरुआत से जानता था। यह मेल टाइगर टी-57 और बाघिन टी-60 के पहले बच्चाें में से एक था। यह दाे भाई और एक बहन है। यह रणथंभाैर के जाेन नंबर दाे से जाेन एक में आ गया था। अपने भाई टी-97 के साथ इसकी खूब साइटिंग हाेती थी। इस वजह से यह टूरिस्ट का पसंदीदा था। यह स्वभाव से अच्छा टाइगर माना था।
इसे यूज-टू टाइगर भी कहा जाता था। इस टाइगर की मुकंदरा की एमटी-2 बाघिन से जाेन नंबर एक में मुलाकात हाेती रहती थी। बाद में यह मुकंदरा की दरा रेंज में उस फेंसिंग के आसपास नजर आता था, जहां एमटी-2 थी। इसके पिता के गाल पर त्रिशूल जैसा निशान था।
टाइगर रिजर्व काे टूरिज्म के लिए खाेलें
बाघाें की माॅनिटिरिंग के लिए टूरिज्म जरूरी है। सरकार के पास इतने संसाधन नहीं होते, जिससे हर समय माॅनिटिरिंग और ट्रैकिंग करवा सके। ऐसे में टूरिस्ट सेे हर पल की जानकारी मिलने चाैकसी ज्यादा रहती है। रणथंभाैर सहित अन्य टाइगर रिजर्व देख लीजिए जहां टूरिस्ट के लिए ओपन किया हुआ है। वहां टाइगर सुरक्षित हैं। मुकंदरा को टूरिस्ट के लिए तुरंत खोलने का निर्णय लेना बहुत जरूरी है।
लापरवाही से हुई बाघ की माैत
टाइगर की देखभाल संवेदनशील मामला है। ऐसा काेई मामला सामने आने पर तत्काल एक्शन लेना चाहिए। स्थिति गंभीर लगे ताे तुरंत इलाज कराे। कितना भी काम क्याें न हाे, सबकाे एक तरफ रखकर टाइगर पर ही ध्यान देना चाहिए। एमटी-3 के मामले में जिस तरह से अधिकारियाें ने 5 दिन तक इलाज का इंतजार किया वाे साफ ताैर पर लापरवाही है।
बीमारी की जानकारी मिलते ही इलाज शुरू कराया, कोई लापरवाही नहीं: डीसीएफ
Q. 5 दिन से बाघ बीमार था। प्राॅपर इलाज नहीं हुआ है। विभाग की सीधी-सीधी लापरवाही बताई जा रही है?
A. बाघ के लंगड़ा के चलने की जानकारी 19 जुलाई काे मिली थी। तत्काल डाॅक्टर अखिलेश पांडे और तेजेंद्रसिंह रियाड़ काे भिजवाकर ट्रीटमेेंट शुरू किया है। लापरवाही नहीं है।
Q. बाघ की हालत खराब थी ताे इसके इलाज का तत्काल निर्णय क्याें नहीं लिया गया?
A. बाघ के बीमार होने की सूचना के बाद 19 जुलाई काे ही टीम काे भिजवा दिया। माॅनिटिरिंग टीम पूरी तरह तैनात रही है। इसके अलावा आईवीआईआर से संपर्क कर किल के साथ दवा भी देने का प्रयास किया।
Q. बाघ की माैत का कारण चाेट से बताई जा रही है?
A. नहीं ,यह गलत है। बाघ काे किसी भी तरह की चाेट नहीं है। यह आप पाेस्टमार्टम टीम से भी पूछ सकते हैं।
Q. अब बाहर घूम रही बाघिन की सुरक्षा और माॅनिटिरिंग काे लेकर क्या करेंगे?
A. अभी इसकी निगरानी चल रही है। जाे निर्देश मिलेंगे उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
^मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बाघ एमटी-3 की आकस्मिक मृत्यु बहुत ही दुखद है। अब विभाग के अधिकारियों को इस तरह के प्रयास करने चाहिए कि आगे से इस प्रकार की दुखद घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो तथा हम शेष बाघों का संरक्षण कर सकें।
- ओम बिरला, लोकसभा अध्यक्ष
^मुकंदरा में बाघ की माैत की घटना दुखद है। जाे बाघिन बाहर है उसका क्या हाेगा। उसके बारे में साेचना ज्यादा जरूरी है। अब बाहर मेल टाइगर नहीं है। इसलिए उसकाे एनक्लाेजर के अंदर शिफ्ट किया जा सकता है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से बात करके इसकी स्ट्रेटजी बनाएंगे। अभी पाेस्टमार्टम हाेने दीजिए।
-जीवी रेड्डी, हैड ऑफ फाॅरेस्ट राजस्थान
^जांच के निर्देश दिए हैं। पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट आने के बाद विस्तृत जांच हाेगी। बाकी प्राइमरी जांच कर रहे हैं। यह दाे दिन से लंगड़ा रहा था। हमने डाॅक्टर भी भेजा था। इसके बाद पहले ही उसकी डेथ हाे गई। बाहर जाे बाघिन घूम रही है। उसकी सुरक्षा के लिए भी प्रयास करेंगे।
सुखराम विश्नाेई, वन मंत्री राजस्थान सरकार
^एमटी-3 बाघ की माैत की घटना बड़ी दुखद है। काेटा में बाघाें काे लेकर पर्यटन की उम्मीद बंधी थी। अचानक यह बाघ काल के गाल में चला गया। इस मामले में लापरवाही की तुरंत उच्चस्तरीय जांच हाेनी चाहिए। इसमें दाेषियाें के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
-संदीप शर्मा, विधायक, काेटा दक्षिण
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