एसीबी की टीम ने एक सरकारी डॉक्टर को 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। झालावाड़ एसीबी की टीम ने शुक्रवार को आरोपी डॉ. राजेश कुमार बड़ितिया को उसके सरकारी आवास से घूस की राशि के साथ पकड़ लिया। आरोपी ने रिश्वत की राशि एक गरीब किसान से एमएसली रिपोर्ट बनाने के लिए मांगे थे।
झालावाड़ एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भवानीशंकर मीणा ने बताया कि रामगंजमंडी उपखंड के तेलियाखेड़ी गांव निवासी परिवादी किशोर पुत्र लालचंद मीणा ने 1 जुलाई को हमारे ऑफिस आकर डॉक्टर द्वारा रिश्वत मांगने और कार्रवाई करवाने की बात कही। इस पर हमने अगले दिन 2 जुलाई को इस मामले का सत्यापन करवाया तो मामला सही निकला।

इसके बाद 3 जुलाई को हमारी टीम रामगंजमंडी पहुंची और जाल बिछाया। परिवादी किशोर डॉक्टर द्वारा मांगे गए रिश्वत के रुपए लेकर उसके सरकारी आवास पहुंचा। डॉक्टर ने राशि लेकर अपने पास रख ली, परिवादी का ईशारा पाते ही एसीबी टीम ने डॉक्टर को रंगे हाथों घूस की राशि के साथ गिरफ्तार कर लिया।

घर जाकर तय किया भ्रष्टाचारी की शिकायत करूंगा
परिवादी किशोर ने बताया कि घर आने के बाद मेरे मन में आया कि नियमानुसार काम करने के लिए भी अगर हजारों रुपए की घूस देनी पड़े तो इससे शर्म की बात क्या हो सकती है। वैसे भी घूस लेने और देने वाला दोनों ही बराबर के जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में मैंने मन में सोच लिया था कि ऐसे भ्रष्टाचारी डॉक्टर को जेल की सलाखों के पीछे डालकर ही रहूंगा। इसके बाद मैंने एसीबी झालावाड़ जाकर शिकायत दी और पूरा घटनाक्रम बताया।

ऐसे जायज काम के लिए घूस को मजबूर करते हैं सरकारी कर्मचारी
साब, मैं गरीब किसान हूं, थोड़ी बहुत जमीन है, लेकिन उसमें भी हर साल कोई विपदा आ जाती है और हमारी फसल खराब हो जाती है। ऐसे में हमारे परिवार को गुजारा चलाना भी मुश्किल है। ऐसे में एमएलसी रिपोर्ट के बदले मैं आपको रिश्वत के दस हजार रुपए कहां से लाकर दूं। डॉक्टर तो भगवान का दूसरा रूप होता है, मेरे लिए आप भगवान समान है। कम से कम मुझ पर रहम खाकर नियमानुसार ही रिपोर्ट बना दीजिए।

मैं जीवनभर आपका ऋणी रहूंगा। कुछ इसी तरह तेलियाखेड़ी के गरीब किसान किशोर मीणा ने रामगंजमंडी के सरकारी डॉक्टर राजेश कुमार बड़ितिया से विनती की थी। लेकिन लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर घूस लेने वाले ऐसे सरकारी लोगों को गरीबों को किसी की परवाह नहीं होती। परिवादी के निवेदन को दरकिनार कर आरोपी डॉक्टर ने कहा कि भैया... बिना पैसे एमएलसी रिपोर्ट नहीं बनेगी, चाहे तुम कुछ भी कर लो। इस काम के लिए कम से कम 10 हजार रुपए लगेंंगे। जब सारे रास्ते बंद हो गए तो परिवादी ने 8 हजार रुपए में सौदा तय किया और 1500 रुपए घूस की राशि के एडवांस देकर घर लौट गया।

एसीबी के जाल में ऐसे फंस गया भ्रष्ट डॉक्टर
एसीबी के एएसपी भवानीशंकर मीणा ने बताया कि परिवादी किशोर ने हमें 1 जुलाई को डॉक्टर द्वारा घूस मांगे जाने की शिकायत दी थी। इसके बाद हमने 2 जुलाई को सबसे पहले इस शिकायत का सत्यापन करवाया। परिवादी को हमने टेप रिकार्डर के साथ डॉक्टर के पास भेजा। परिवादी ने 2 जुलाई को दूसरी बार 1500 रुपए डॉक्टर को दिए। इस दौरान परिवादी और डॉक्टर के बीच हुई पूरी बातचीत रिकॉर्ड हो गई। सत्यापन में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद एसीबी ने भ्रष्ट डॉक्टर को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बुना।

3 जुलाई को परिवादी रिश्वत में तय हुए बचे हुए 5 हजार रुपए लेकर आरोपी डॉक्टर राजेश कुमार के सरकारी आवास पहुंचा। डॉक्टर ने रिश्वत राशि लेकर अपने ग्रे कलर के लोअर की दाहिनी जेब में रखी थी। परिवादी का ईशारा पाते ही एसीबी की टीम ने आरोपी डॉक्टर को घूस की राशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी टीम में सब इंस्पेक्टर कन्हैयालाल, गोपाल लाल, देवदानसिंह, वरिष्ठ सहायक प्रमेश कुमार, सूरजमल शामिल थे।
इसलिए चाहिए थी परिवादी को एमएलसी रिपोर्ट
तेलियाखेड़ी निवासी किशोर के पिता लालचंद मीना का गांव में किसी से विवाद हो गया था। इस मारपीट में किशोर के पिता का एक पैर कट गया था। किशाेर को पुलिस केस में एमएलसी रिपोर्ट चाहिए थी, ऐसे में वह कई दिनों से डॉक्टर के चक्कर लगा रहा था। बिना एमएलसी रिपोर्ट के पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी। जब कई दिनों तक बात नहीं बनी तो वह डाॅक्टर से पर्सनल मिला तो डॉक्टर ने अपने गलत मंसूबे जाहिर कर दिए।

तलाशी में नहीं मिली ज्यादा संपत्ति
एसीबी सूत्रों ने बताया कि आरोपी डॉक्टर के रामगंजमंडी स्थित सरकारी आवास पर कुछ भी नहीं मिला। आरोपी डॉक्टर का कोटा के केशवपुरा में रामजानकी मंदिर क्षेत्र में अच्छा मकान है। वहां कोटा की एसीबी टीम ने तलाशी ली थी, प्रथमदृष्टया ज्यादा संपत्ति नहीं मिली है। हालांकि, एसीबी अभी जांच कर रही है।

भास्कर नॉलेज: यह होती है एमएलसी रिपोर्ट
पुलिस और चिकित्सा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मारपीट से संबंधित मामले में शिकायती जब थाने पहुंचता है तो एफआईआर दर्ज करने के दौरान पुलिस एमएलसी (मेडिको लीगल सर्टिफिकेट) भी मांगती है। इस रिपोर्ट से यह पता लगता है कि शिकायत करने वाले को कितनी और किस स्तर की चोट लगी है। एमएलसी रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस नॉर्मल या संगीन धाराएं एफआईआर में लगाती है।

इस रिपोर्ट में डॉक्टर की राय भी होती है। अगर किसी मामले में केस पहले से दर्ज हो चुका है और एमएलसी की रिपोर्ट बाद में आती है तो एमएलसी रिपोर्ट में दी गई राय के हिसाब से धाराएं लगाई जाती हैं। जब मामला अदालत के सामने जाता है, तो सुनवाई के दौरान एमएलसी को एक अहम दस्तावेज माना जाता है। वहीं, सरकारी अस्पतालों में कराई गई एमएलसी रिपोर्ट को तवज्जो दी जाती है। इसी बात का फायदा उठाकर कुछ भ्रष्ट डॉक्टर इस रिपोर्ट को गलत तरीके से बनाकर बेईमानी की दुकान चला रहे हैं।

सरकारी तंत्र को सुधारने के लिए आगे आएं लोग
^रामगंजमंडी के इस सरकारी डॉक्टर के पास मेडिकल जूरिस्ट का भी प्रभार था। आरोपी ने गरीब किसान से जायज रिपोर्ट के बदले भी 10 हजार रुपए मांगे थे। यह हमारे सरकारी तंत्र का सबसे बदनुमा दाग और गंभीर बात है। हमने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच चल रही है। एसीबी की आमजन से अपील है कि अगर आपको को भी कोई रिश्वत के लिए परेशान करता है तो आप भी शिकायत कर भ्रष्ट लोगों को जेल भिजवाकर जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें।
- भवानीशंकर मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी, झालावाड़



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The poor farmer did not listen to the complaint, the corrupt doctor was caught red handed taking a bribe of Rs 5000
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